सागर में घड़ी डिटर्जेंट फैक्टरी के कारण क्या किसानों का जीवन नर्क बन रहा है,हो रही पानी और खेती खराब



 

 

 

किसी इलाके में अगर एक बड़ी फैक्ट्री कारखाना या उद्योग आ जाये तो उस इलाके में रोजगार के साथ कई एक अवसर भी आ जाते है लेकिन उस फैक्ट्री के कारण अगर लोगो को अपना घर बार जमीन जायदाद छोड़कर पलायन करने मजबूर होना पड़े तो इसे आप क्या कहेंगे। हमारी आज की ये रिपोर्ट किसी फैक्ट्री या उद्योग के खिलाफ नहीं है बल्कि ये पीड़ा जाहिर करती है उन लोगो की जिनका जीना इस फैक्ट्री के कारण दूभर हो गया है। और इन पीड़ितों की सुनने वाला कोई नहीं है।

अपना दर्द बयान करते ये लोग है एमपी के सागर के सिद्धगुआ के रहने वाले है। कई सालो पहले सागर के सिदगुंवा क्षेत्र जो इंडस्ट्रियल एरिया में घडी साबुन डिटर्जन की फैक्ट्री आरएसपीएल लिमिटेड की दो यूनिट आयी। इस फैक्ट्री के आने के बाद आसपास के लोगो में खुशहाली आने की उम्मीद भी जागी लेकिन साथ ही किसे मालूम था जल्द ही उन्हें इसके दुष्परिणाम भी भोगने पड़ेंगे।

एमपी के सागर से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर सिदगुंवा क्षेत्र जो इंडस्ट्रियल एरिया है। यहां पास ही केरवना में रहने वाले किसानों और रहवासियों का बुरा हाल है। आलम ये है की इन्हे यहाँ पिने का शुद्ध पानी तक नसीब नहीं है। अच्छी खासी उपजाऊ जमीन की हालत इतनी ख़राब हो गयी की खेती करने के लायक नहीं रह गयी है। यहाँ के लोगो का आरोप है की आरएसपीएल फैक्टरी की वजह से उनके खेत खराब हो गए, इतना ही नहीं जो पानी था वो भी पीने लायक नहीं बचा है। अगर किसान इस पानी से फसलों में सिंचाई करते हैं तो उनकी फसल खराब हो जाती है। यहां के किसान करीब पांच सालों से परेशान हैं।

इस फैक्ट्री में घड़ी साबुन डिटर्जेट जैसे उद्पाद बनाये जाते हैं। कुछ साल पहले ये फैक्टरी शुरू हुई थी शुरुआत में तो किसानों को कोई दिक्क्त नहीं हुई लेकिन करीब दो सालों के बाद किसानों को पता चला की उनके खेतों में जो कुँए और बोरबेल हैं। उनमें से प्रदूषित पानी निकला रहा है। जो किसान पहले कई एकड़ों में फसलें लगाते थे अब वो दायरा से कर कुछे एकड़ में रह गया है। तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने फसल लगाना ही बंद कर दिया है। और इसकी सीधी वजह है। पानी खराब होना। इस पानी से अगर वो नहा लें तो इससे शरीर में खुजली होने लगती है। आलम ये है की स्थानीय निवासी दूर दराज से पानी खरीदकर लाते हैं। ये सिलसिला आज भी जारी हैं।

बताया जाता है की पहले समस्या सिर्फ आसपास ही थी लेकिन धीरे-धीरे ये बढ़ती जा रही है। मतलब इस फैक्टरी के अगल बगल जो खेत हैं। वो तो खराब हैं। ही अब इसका दायरा बढ़ता जा रहा है मतलब जिनके खेत इस फैक्टरी से दूर हैं। वहाँ पर भी यही स्थिति है।

स्थानीय किसानों ने जिले के तमाम जिम्मेदारों से इस बात की शिकायत की, लेकिन आज तक कुछ भी नही हुआ। हैरानी की बात तो ये है। की प्रदुषण जांच केंद्र शायद इससे अनजान है।जब हमने जिम्मेदार अधियकारियों से सवाल किया तो बताया गया की ऐसी जानकारी ही उनके पास नहीं आयी है। अगर आती है तो सम्बंधित फैक्टरी पर कार्यवाई की जायेगी। अधिकारी ऐसा बताते हैं की आज वहाँ किसी तरह की परेशानी नहीं है पहले जरूर थी।

इसके बाद हमे RSPL Ltd. फैक्टरी प्रबधन से बात करने की कई बार कोशिश की लेकिन कैमरे पर कुछ भी कहने से साफ़ इंकार किया उधर इस खबर की पड़ताल करते हुए हम जब हमने डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में रसायन विभाग के प्रोफ़ेसर डॉ. नीरज उपाध्याय से मिले उन्होंने बताया अगर किसी साबुन फैक्टरी का वेस्टेज पानी जमीन में मिल जाये तो एक लेयर बन जाती है। जिससे ऐसा हो सकता है लेकिन ये जांच का विषय है। लेकिन उन्होंने ये भी कहा की वेस्टेज पानी में मिलने से बीमारियां कई तरह के रोग हो सकते हैं। वहीँ पेड़ पौधों को भी इससे नुक्सान है।

अब सबसे बड़ा सवाल ये है की आखिर इन किसानो की सुनने वाला कौन है क्या थक हार क्र किसानो को आखिर कार अपनी जमीन छोड़कर पलायन करने मजबूर होना पड़ेगा या फिर ये सोता प्रशासन उनकी बात सुनेगा और इनकी तकदीर का सही फैसला हो पायेगा

By - SARJU PATEL, STVN INDIA - SAGAR TV NEWS
17-Nov-2021


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