सागर के टहरा टिहरी में मां ज्वाला देवी का प्राचीन मंदिर, नवरात्रि पंचमी पर उमड़ते हैं भक्त
देशभर में शारदीय नवरात्रि की धूम है। कहीं गरबा हो रहा है, तो कहीं माता रानी के भजन और जवारे की परंपरा निभाई जा रही है। इसी आस्था के बीच सागर जिले के टहरा टिहरी गांव में मां ज्वाला देवी का एक प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि मां ने एक भक्त को सपने में दर्शन देकर अपने यहां होने का संकेत दिया था। नवरात्रि की पंचमी पर यहां विशेष मेला लगता है और दूर-दूर से श्रद्धालु चुनरी चढ़ाने पहुंचते हैं।
यह मंदिर सागर से करीब 33 किलोमीटर दूर, सागर-भोपाल मार्ग के पास स्थित बेरखेड़ी सड़क गांव से लगभग तीन किलोमीटर पश्चिम दिशा में टहरा टिहरी में है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर करीब 200 से 300 साल पुराना है। कहा जाता है कि एक भक्त को सपने में मां ज्वाला देवी ने दर्शन दिए और पहाड़ी के नीचे पत्थर पर अपने चरणचिह्न होने की बात कही। भक्त ने जब वहां जाकर चरणचिह्न देखे, तो गांव में माता के जयकारे गूंज उठे।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के लंबरदार बद्री प्रसाद शुक्ला और उनके परिवार की मनोकामना पूरी होने के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। वर्तमान में मंदिर में मां ज्वाला देवी के साथ मां अन्नपूर्णा और मां महालक्ष्मी की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। मंदिर से जुड़ी एक और दिलचस्प मान्यता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले करीब 25 वर्षों से नवरात्रि की पंचमी पर कत्थई रंग की एक बड़ी तितली दिखाई देती है, जिसके पंखों पर पांच गोल निशान होते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीण बुजुर्गों के अनुसार, अमान सिंह नाम के एक पंडा मां ज्वाला देवी के अनन्य भक्त थे। मंदिर तक पहुंचने में पहले काफी कठिनाई होती थी, लेकिन अब रास्ता सुगम होने से दोपहिया और चारपहिया वाहन पहाड़ी तक पहुंच सकते हैं। आस्था, लोकमान्यताओं और पुरानी परंपराओं से जुड़ा टहरा टिहरी का मां ज्वाला देवी मंदिर नवरात्रि में श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।