साड़ी-लहंगे में थिरके पुरुष बंदी, भैरवगढ़ जेल में अनोखा गरबा
महाकाल की नगरी उज्जैन में नवरात्रि का उत्साह जेल की सलाखों तक पहुंच गया है। केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में पुरुष बंदियों ने साड़ी और लहंगा पहनकर गरबा किया। ढोलक की थाप, मंजीरों की खनक और मां दुर्गा के भक्ति गीतों के बीच बंदियों ने पारंपरिक गरबा रास में हिस्सा लिया। खास बात यह है कि यहां किसी डिजिटल म्यूजिक सिस्टम की जगह बंदी खुद गीत गा रहे हैं और वाद्ययंत्र बजाकर माहौल को भक्तिमय बना रहे हैं। आमतौर पर जेल की चारदीवारी के भीतर अनुशासन और दिनचर्या का माहौल रहता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान भैरवगढ़ जेल में भक्ति और उत्सव का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है। जेल परिसर के पद्मावती माता मंदिर और दोनों प्रमुख खंडों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं के सामने सुबह से पूजा-अर्चना की जाती है। शाम को महाआरती के बाद गरबा शुरू होता है, जिसमें बंदी पूरे उत्साह के साथ शामिल होते हैं।
इस आयोजन की सबसे खास तस्वीर पुरुष बंदियों की है, जो महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा साड़ी और लहंगे में गरबा करते नजर आते हैं। ताल से ताल मिलाकर नृत्य करते बंदियों का यह रूप जेल के भीतर नवरात्रि की अनूठी झलक पेश करता है। धार्मिक गतिविधियों के जरिए बंदियों को अपनी आस्था से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
जेल प्रशासन के अनुसार, इस बार कुल दो हजार से अधिक बंदियों में से 647 बंदियों ने नौ दिनों का उपवास रखा है। जेल अधीक्षक मनोज कुमार साहू के नेतृत्व में व्रत रखने वाले बंदियों के खानपान और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है। उन्हें सुबह चाय, दूध और केले के साथ फलाहार में साबूदाने की खिचड़ी, मूंगफली और चिप्स दिए जा रहे हैं। भैरवगढ़ जेल का यह आयोजन बताता है कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गतिविधियां जेल के भीतर भी अपनी जगह बना सकती हैं। नवरात्रि के इन नौ दिनों में गरबा और पूजा-अर्चना के जरिए बंदियों को सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।