नशे के खिलाफ बड़ा अभियान, 18 महीने में 1615 आरोपी जेल पहुंचे
मध्य प्रदेश के रीवा संभाग में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पिछले 18 महीनों में नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े 1615 आरोपियों को जेल भेजा गया है। पुलिस ने हेरोइन, स्मैक, ब्राउन शुगर और एमडी ड्रग्स समेत करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थ जब्त किए हैं। अब सरकार का फोकस सिर्फ नशे के सौदागरों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी है। मंगलवार को रीवा के राजनिवास में उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, रीवा जोन के आईजी गौरव राजपूत, पुलिस अधीक्षक गुरकरण सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों, उत्पादकों और सप्लायरों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट सहित संबंधित कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या के कारण विंध्य के विकास और युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए। बैठक में आईजी गौरव राजपूत ने बताया कि 18 महीनों में पुलिस ने 5,535 किलो से अधिक गांजा, करीब 97 हजार 665 कोरेक्स शीशियां और 4 लाख 13 हजार से अधिक नशीली टैबलेट-कैप्सूल जब्त किए हैं। हेरोइन, स्मैक, ब्राउन शुगर और एमडी ड्रग्स की कीमत करीब 13 करोड़ 17 लाख रुपये आंकी गई है।
नशे के कारोबार में इस्तेमाल किए जाने वाले 312 दोपहिया और चारपहिया वाहन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अब सप्लाई नेटवर्क और दूसरे राज्यों से जुड़े संभावित संपर्कों की जांच पर जोर दे रही है। दूसरी ओर, नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की तैयारी भी की जा रही है। कलेक्टर के मुताबिक, 50 लोगों को चिह्नित कर इसी सप्ताह नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराने की योजना है। इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद भी ली जाएगी। रीवा में नशे के खिलाफ अब दोहरी रणनीति पर जोर है—तस्करों पर सख्त कार्रवाई और नशे से पीड़ित लोगों का उपचार। इस अभियान का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।