अंतरिक्ष विज्ञान के साथ महिला सुरक्षा के लिए तैयार की नई तकनीकी पहल
एक युवा इंजीनियरिंग छात्र ने अंतरिक्ष विज्ञान और महिला सुरक्षा को जोड़कर नवाचार की नई राह तलाशने की पहल की है। भोपाल में बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे प्रखर विश्वकर्मा ने ‘प्रोजेक्ट दुर्गा शक्ति’ और ‘एयरो एक्स सुरक्षा’ जैसी अवधारणाएं पेश की हैं। उनका लक्ष्य तकनीक के जरिए महिलाओं में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आपात स्थिति में मदद पहुंचाने वाले समाधान विकसित करना है।
एमपी के सागर संभाग के टीकमगढ़ जिले के प्रखर विश्वकर्मा बंसल इंस्टीट्यूट, भोपाल में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। वे अंतरिक्ष विज्ञान और स्वदेशी तकनीक में भी रुचि रखते हैं। प्रखर ने विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 2026 से संबंधित एक सम्मान प्रमाणपत्र साझा किया है, जिसमें उन्हें युवा एयरोस्पेस स्टार्टअप के संस्थापक के रूप में उल्लेखित किया गया है। यह प्रमाणपत्र उनके नवाचार और एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रयासों को रेखांकित करता है।
प्रखर की पहली पहल है ‘प्रोजेक्ट दुर्गा शक्ति’। इसका उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक करना, आत्मविश्वास बढ़ाना और सुरक्षित सामाजिक वातावरण बनाने के लिए प्रेरित करना है। इस पहल में तकनीक, जागरूकता और कौशल विकास को एक साथ जोड़ने की परिकल्पना की गई है।
वहीं, उनकी दूसरी पहल ‘एयरो एक्स सुरक्षा’ के तहत एक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण की अवधारणा प्रस्तुत की गई है, जिसे ‘एस्केप पॉड’ नाम दिया गया है। प्रस्तावित डिजाइन में की-चेन और पहनने योग्य बैंड जैसे विकल्प शामिल हैं।
इसमें SOS अलर्ट, तेज आवाज वाला अलार्म, स्ट्रोब लाइट और आपातकालीन संपर्कों तक लोकेशन भेजने जैसी सुविधाओं की परिकल्पना की गई है। साथ ही ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और आपात स्थिति में बच निकलने में मदद करने वाले यांत्रिक तंत्र पर भी विचार किया गया है।
हालांकि, इन सुविधाओं की वास्तविक उपयोगिता और विश्वसनीयता प्रोटोटाइप निर्माण तथा तकनीकी परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी। डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।
प्रखर की ये पहलें दिखाती हैं कि युवा अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ सामाजिक समस्याओं के समाधान की दिशा में भी सोच सकते हैं। अब देखना होगा कि ये तकनीकी अवधारणाएं आगे चलकर किस तरह व्यावहारिक रूप लेती हैं और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में कितना योगदान दे पाती हैं।