सागर- खुरई से 33 किलोमीटर की चुनरी पदयात्रा, 500 मीटर लंबी चुनरी लेकर निकले श्रद्धालु
ढोल-नगाड़ों की गूंज, भजनों की धुन और माता रानी के जयकारे… शारदीय नवरात्रि के पहले दिन सागर जिले के खुरई में भक्ति का अनूठा नजारा देखने को मिला। यहां श्रद्धालु 500 मीटर लंबी चुनरी लेकर 33 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले। मां ज्वाला देवी के प्रति आस्था से भरी इस चुनरी पालकी पदयात्रा में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। खास बात यह है कि यह धार्मिक परंपरा पिछले 15 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। खुरई के पुराने हनुमान मंदिर से चुनरी पालकी पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा परसा चौराहा, झंडा चौक, पठार, शिवाजी चौक और सागर नाका से होते हुए मां ज्वाला देवी मंदिर, जलंधर के लिए रवाना हुई।
श्रद्धालु 500 मीटर लंबी चुनरी लेकर कदम से कदम मिलाते हुए आगे बढ़े। ढोल-नगाड़ों और भजन मंडली की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। कलाकार भी भजनों की धुन पर थिरकते नजर आए। शहर में जगह-जगह लोगों ने यात्रा का स्वागत किया और श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया। आयोजक पुष्पेंद्र सिंह ठाकुर के मुताबिक, इस चुनरी पालकी पदयात्रा का यह 15वां वर्ष है। श्रद्धालु खुरई से करीब 33 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर जरुआखेड़ा के पास जलंधर गांव की पहाड़ी पर स्थित मां ज्वाला देवी मंदिर पहुंचेंगे।
मंदिर में माता के दर्शन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु माता रानी से परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे। नवरात्रि के पहले दिन खुरई के अन्य देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। किला देवी मंदिर, पठार स्थित महाकाली मंदिर, मरई माता मंदिर, पुराने जनपद चौराहे के पास चंद्रघंटा देवी मंदिर, सराय स्थित मां दुर्गा मंदिर और बीजासेन देवी मंदिर में सुबह से ही भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। नवरात्रि के पहले दिन खुरई में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। 500 मीटर लंबी चुनरी के साथ 33 किलोमीटर की यह पदयात्रा श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति और मां ज्वाला देवी के प्रति विश्वास का प्रतीक बनी।