Sagar -1500 फीट लंबी गुफा से गुजरकर होंगे मां के दर्शन, 41 फीट से गिरेगा अलकनंदा का झरना, दिखेगा अद्भुत सौंदर्य
सागर में नवरात्र में मातारानी के दर्शन के लिए बड़ा बाजार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को इस बार आस्था के साथ रोमांच का अनूठा अनुभव मिलेगा. श्री नवदुर्गा बाल समिति गुफा वाली काली जी की ओर से 59वें वर्ष में ऐसी भव्य झांकी तैयार हैं, जिसमें श्रद्धालु करीब 1500 फीट लंबी गुफा से गुजरते हुए माता के दरबार तक पहुंचेंगे, गुफा के भीतर बाबा केदारनाथ धाम, अलकनंदा नदी, बाबा भूतनाथ और भीम शिला की झांकियां सजाई गई है, प्राकृतिक गुफा और पहाड़ी वातावरण का एहसास कराने के लिए जड़ों, पत्तियों और चट्टानों जैसी बनावट से सजावट की गई है। इस बार नौ साल बाद समिति की ओर से फिर बड़े स्तर पर धार्मिक झांकियां तैयार की गई हैं, आज 12 अक्टूबर से गुफा वाली काली के दर्शन श्रद्धालु कर सकेंगे उनके लिए गुफा के द्वार खोल दिए गए हैं,
समिति के सदस्य अमरदीप, कुलदीप भट्ट ने बताया कि करीब 1500 फीट लंबी गुफा में श्रद्धालुओं को क्रमवार धार्मिक दृश्यों के दर्शन हकर सकेंगे, गुफा के दोनों ओर प्राकृतिक स्वरूप देने के लिए पौधों की जड़ें, पत्तियां और पहाड़ी बनावट तैयार की जा रही है। कोशिश है कि श्रद्धालु जब गुफा से गुजरें तो उन्हें किसी पहाड़ी क्षेत्र के प्राकृतिक रास्ते से होकर देवस्थलों तक पहुंचने जैसा अनुभव हो। निर्माण और सजावट के काम में समिति के सदस्य लगातार जुटे हैं। 59वें वर्ष के आयोजन को खास बनाने के लिए नौ साल बाद फिर भव्य झांकियां तैयार की गई हैं,
समिति के सदस्य नितिन भट्ट व दिलीप अग्रवाल ने बताया कि गुफा के भीतर ऐसी झांकिया हैं कि श्रद्धालु एक-एक दृश्य देखते हुए आगे बढ़ेंगे। शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण की झांकी, इसके बाद बाबा केदारनाथ धाम के दर्शन, आगे बढ़ने पर अलकनंदा नदी, बाबा भूतनाथ और भीम शिला की झांकियां दिखाई देंगी। गुफा के अंतिम हिस्से में मातारानी का दरबार सजाया गया है, जहां श्रद्धालु 7 फीट ऊंची प्रतिमा के दर्शन करेंगे। इस क्रम में धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक दृश्यों को एक साथ देखने का अवसर मिलेगा।
बाबा केदारनाथ की झांकी तैयार करने में समिति के 75 युवा करीब डेढ़ महीने से जुटे हुए हैं। प्रियांशु और शिवम सोनी ने बताया कि झांकी के ढांचे में लगभग 2000 बांस का इस्तेमाल किया गया है। इसे मजबूत और आकर्षक स्वरूप देने के लिए प्लाईवुड, फेवीकोल, स्स्सी, तार, कील, स्क्रू, कपड़ा, थर्माकोल, पेंट और रंग सहित 10 से 12 तरह की सामग्री का उपयोग किया गया है