किसानों की फसल बचाने के लिए 100 कृष्णमृगों का रेस्क्यू, वन विभाग का अभियान
खेतों में फसलों को नुकसान से बचाने और वन्यजीवों को सुरक्षित ठिकाना देने के लिए मध्य प्रदेश के शाजापुर में वन विभाग ने बड़ा अभियान शुरू किया है। यहां कृष्णमृग और नीलगाय को सुरक्षित पकड़कर दूसरे स्थानों पर भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अभियान के पहले ही दिन हन्नूखेड़ी और पोलायकलां के खेतों से करीब 100 कृष्णमृगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वन विभाग का कहना है कि इस पहल से किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान की समस्या कम करने के साथ वन्यजीवों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
मध्य प्रदेश वन विभाग दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम के सहयोग से यह अभियान चला रहा है। 9 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक शाजापुर जिले के चिन्हित क्षेत्रों में कृष्णमृग और नीलगाय का रेस्क्यू कर उन्हें दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी और पोलायकलां के खेतों में कार्रवाई की गई। इस दौरान करीब 100 कृष्णमृगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर स्थानांतरण के लिए रवाना किया गया। अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों के संरक्षण के साथ खेती-किसानी को होने वाले नुकसान की समस्या का समाधान तलाशना है।
इस अभियान में ग्रामीणों ने भी सहयोग किया। वन विभाग के अनुसार, ग्रामीणों ने संयम बरता, खेतों में अनावश्यक प्रवेश नहीं किया और अपने पालतू कुत्तों को खुला नहीं छोड़ा। कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने स्थानांतरण के लिए रवाना किए जा रहे वाहनों को हरी झंडी दिखाई।
अभियान की नोडल अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक डॉ. किरण बिसेन ने बताया कि दिन में तापमान बढ़ने के कारण वन्यजीवों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए शेष रेस्क्यू कार्य रोक दिया गया। अभियान 11 अक्टूबर को इसी स्थान पर फिर शुरू किया जाएगा। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि अभियान के दौरान खेतों से दूर रहें, पालतू कुत्तों को सुरक्षित रखें और मौके पर अनावश्यक भीड़ न लगाएं। शाजापुर में शुरू हुआ यह अभियान किसानों और वन्यजीवों, दोनों के हितों को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस पहल से फसलों को होने वाले नुकसान में कितनी कमी आती है और वन्यजीवों के सुरक्षित स्थानांतरण का लक्ष्य किस तरह पूरा होता है।