Sagar -पिता की याद में 10 साल से शिक्षा सम्मान, एसपी बेटा भी निभा रहा परंपरा
कहते हैं, पिता की सबसे बड़ी विरासत उनकी दौलत नहीं, बल्कि उनके संस्कार और आदर्श होते हैं। सागर जिले के खुरई में तीन बेटे पिछले 10 साल से अपने दिवंगत पिता की याद को शिक्षा और सेवा के माध्यम से जीवित रखे हुए हैं। हर साल विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया जाता है। खास बात यह है कि इन तीन बेटों में एक उज्जैन में पुलिस अधीक्षक रेडियो के पद पर पदस्थ हैं। पिता की स्मृति में शुरू की गई यह पहल आज विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन रही है।
खुरई के शासकीय नवीन प्रताप माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक रहे स्वर्गीय बालकृष्ण अहिरवार ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दी थीं। उनके निधन के बाद बेटों ने पिता की याद को संजोने और उनके शिक्षा संबंधी आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
इसी उद्देश्य से वर्ष 2016 में ‘स्मृति शिक्षा पुरस्कार’ की शुरुआत की गई। इसके तहत विद्यार्थियों को नकद राशि और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाता है। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले शिक्षकों का भी सम्मान किया जाता है।
पिता के प्रति सम्मान और शिक्षा के प्रति समर्पण की यह परंपरा तीनों बेटे हर साल निभाते हैं। इनमें इंजीनियर एलडी रोहित, उज्जैन में पुलिस अधीक्षक रेडियो के पद पर पदस्थ एचएन अहिरवार और मलेरिया इंस्पेक्टर पीएल रोहित शामिल हैं।
तीनों का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिले और वे मेहनत व लगन के साथ अपने भविष्य को संवारें। यह पहल केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों का महत्व समझाने का प्रयास भी है।
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष नन्नी बाई अहिरवार ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा के साथ संस्कारों का होना भी बेहद जरूरी है। पिता की याद में शुरू किया गया यह सम्मान समारोह विद्यार्थियों को आगे बढ़ने और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देता है।
पिता की स्मृति को सेवा का माध्यम बनाकर तीनों बेटे एक मिसाल पेश कर रहे हैं। दस साल से जारी यह पहल बताती है कि अपनों की याद को समाज के लिए कुछ अच्छा करके भी हमेशा जीवित रखा जा सकता है। स्वर्गीय बालकृष्ण अहिरवार के संस्कार आज विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने का काम कर रहे हैं।