सरकारी पुल नहीं बना तो ग्रामीणों ने बनाया ‘तैरता पुल’, जान जोखिम में डालकर आवाजाही | SAGAR TV NEWS
एमपी के सागर संभाग के टीकमगढ़ जिले के मोहनगढ़ तहसील के रानीपुरा गांव से विकास के दावों के बीच हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। गांव में वर्षों से स्थायी पुल की मांग पूरी नहीं हुई तो ग्रामीणों ने खुद ही जुगाड़ से पानी पर तैरने वाला पुल बना डाला। प्लास्टिक के ड्रम, बांस और रस्सियों की मदद से तैयार किए गए इस अस्थायी पुल के सहारे अब बच्चे, बुजुर्ग और ग्रामीण रोजाना आवाजाही करने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा खतरा यह है कि पुल लगातार हिलता रहता है और संतुलन बिगड़ने पर कोई भी व्यक्ति सीधे गहरे पानी में गिर सकता है। तस्वीरें देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। पानी के ऊपर ड्रमों को जोड़कर उनके ऊपर बांस और रस्सियों की मदद से पुलनुमा रास्ता तैयार किया गया है। यही पुल अब रानीपुरा गांव के लोगों की मजबूरी बन गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव से बाहर आने-जाने के लिए तालाब के भराव क्षेत्र से होकर गुजरने वाला यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है। बारिश के मौसम में पानी बढ़ने के बाद आवाजाही मुश्किल हो जाती है। दूसरा रास्ता कई किलोमीटर लंबा और खराब स्थिति में बताया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और प्लास्टिक के ड्रम सहित अन्य सामग्री जुटाकर यह अस्थायी पुल तैयार कर लिया। अब बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। वहीं ग्रामीण अस्पताल, बाजार, खेत और मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए भी इसी पुल का इस्तेमाल करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी पुल निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार आवेदन और शिकायत की गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका आरोप है कि मजबूरी में उन्हें खुद ही यह जोखिम भरा रास्ता तैयार करना पड़ा। मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत सीईओ विशाल धाकड़ ने भी इसका संज्ञान लिया है।
उनका कहना है कि ग्रामीणों ने ड्रमों के ऊपर पुलनुमा आकृति बनाई है, जिस पर लोग चलकर पानी पार कर रहे हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों की समस्या का जल्द समाधान करने की बात कही है। फिलहाल ग्रामीणों का यह तैरता पुल उनकी मजबूरी और सरकारी इंतजार की तस्वीर दिखा रहा है। अब प्रशासन के आश्वासन के बाद देखना होगा कि रानीपुरा के लोगों को यह जोखिम भरा रास्ता कब तक इस्तेमाल करना पड़ता है और स्थायी पुल की मांग कब पूरी होती है।