बांधों का जलस्तर घटा, रबी की सिंचाई पर मंडराया संकट | SAGAR TV NEWS |
एमपी के रायसेन जिले में इस बार बारिश के बाद भी किसानों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है। जिले के प्रमुख बांधों में पिछले साल की तुलना में कम पानी होने से अब रबी की फसलों की सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि गेहूं और चना जैसी फसलों के लिए जरूरी सिंचाई का पानी आखिर कहां से आएगा? जिले के सबसे बड़े जलाशय बारना बांध से करीब 80 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई जुड़ी है, ऐसे में कम जल भंडारण किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
रायसेन जिले में इस वर्ष बारिश कम होने का असर अब जलाशयों पर साफ दिखाई दे रहा है। बारना बांध में करीब 19.61 प्रतिशत और दाहोद डेम में करीब 33.61 प्रतिशत पानी कम होने की बात सामने आई है। ऐसे में रबी सीजन की फसलों की सिंचाई को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
गेहूं और चना जैसी रबी फसलों को सामान्य तौर पर चार से पांच सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन बांधों में कम पानी होने की स्थिति में नहरों के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। किसानों को दो से तीन सिंचाई तक ही सीमित रहना पड़ सकता है।
बारना बांध से रायसेन जिले की उदयपुरा विधानसभा के साथ भोजपुर और सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र के किसानों को भी सिंचाई का पानी मिलता है। करीब 80 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई इस जलाशय से जुड़ी बताई जा रही है। ऐसे में बांध में कम जल भंडारण का सीधा असर खेती पर पड़ने की आशंका है। सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि गर्मियों में पेयजल की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। रायसेन, बाड़ी, मंडीदीप, औबेदुल्लागंज और आसपास के इलाकों में इन जलस्रोतों से पानी की सप्लाई होती है। ऐसे में प्रशासन के सामने सिंचाई के साथ-साथ गर्मी के लिए पेयजल सुरक्षित रखने की भी चुनौती रहेगी।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की नजर भी जलाशयों में उपलब्ध पानी और आगामी जरूरतों पर है। पानी का संतुलित उपयोग और नहरों के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था बनाए रखना इस रबी सीजन में बेहद महत्वपूर्ण होगा। रायसेन में कम बारिश के बाद बांधों का घटता जलस्तर किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि उपलब्ध पानी से रबी फसलों की सिंचाई और गर्मियों की पेयजल जरूरतों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।