हॉस्टल की बदहाली पर छात्राओं का हंगामा, कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी
एमपी के ग्वालियर में आदिम जाति कल्याण विभाग के हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं का गुस्सा आज सामने आया। बड़ी संख्या में छात्राएं अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। छात्राओं ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारी विवेक पांडे के खिलाफ नारेबाजी की। छात्राओं ने भोजन, साफ-सफाई, बिजली और रहने की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। छात्राओं ने अधिकारियों से समस्याओं का जल्द समाधान कराने की मांग की। दरअसल, आदिम जाति कल्याण विभाग के हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं है और खाना बनाने से लेकर परोसने तक साफ-सफाई का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता।
छात्राओं ने हॉस्टल में रहने की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई बार उन्हें हॉस्टल से बाहर जाने के लिए कहा जाता है। लेकिन सबसे ज्यादा नाराजगी बिजली व्यवस्था को लेकर सामने आई। छात्राओं का कहना है कि परीक्षाओं के समय पढ़ाई के लिए बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन उसी दौरान उनके कमरों की लाइट काट दी जाती है। छात्राओं का आरोप है कि बिजली नहीं होने पर उन्हें दूसरे स्थान पर जाकर रहने और पढ़ाई करने के लिए कहा जाता है। इन समस्याओं से परेशान होकर छात्राएं एकजुट होकर ग्वालियर कलेक्ट्रेट पहुंचीं और अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखी।
कलेक्ट्रेट परिसर में छात्राओं ने संबंधित अधिकारी विवेक पांडे के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की। छात्राओं के मुताबिक, उन्होंने अपनी समस्याओं से संबंधित आवेदन भी अधिकारी को सौंपा। बताया गया कि आवेदन मिलने के बाद अधिकारी की ओर से छात्राओं को आश्वासन दिया गया है कि करीब एक महीने के भीतर हॉस्टल में जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का प्रयास किया जाएगा। अब छात्राओं को इंतजार है कि यह आश्वासन कब तक जमीन पर दिखाई देता है। फिलहाल छात्राओं ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रख दी हैं। अब सवाल है कि भोजन, साफ-सफाई, बिजली और रहने जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर की गई शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई होती है। छात्राओं की मांग है कि उन्हें पढ़ाई के लिए बेहतर और सुरक्षित माहौल के साथ जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।