घाटों पर SP-DFO का एक्शन, ड्रोन से तलाशे रेत माफिया के रास्ते
अवैध रेत उत्खनन पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। छुट्टी के दिन जिला टास्क फोर्स अचानक चंबल के घाटों पर पहुंची। एमपी के मुरैना जिले के एसपी धर्मराज मीना और डीएफओ एचसी बघेल समेत पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने कई घंटों तक संवेदनशील घाटों का निरीक्षण किया। खास बात यह रही कि एसपी ने खुद ड्रोन उड़ाकर चंबल के घाटों और आसपास के इलाकों की निगरानी की। इस दौरान रेत के संभावित अवैध परिवहन के रास्तों को चिन्हित कर जेसीबी से बंद कराया गया।
अधिकारियों की टीम सबसे पहले रिठौरा के कुल्हाड़ा घाट और गड़ौरा घाट पहुंची। इसके बाद राजघाट पर भी निरीक्षण किया गया। कार्रवाई और निरीक्षण का सिलसिला रात करीब पौने आठ बजे तक चला।
कुल्हाड़ा घाट पर एसपी धर्मराज मीना ने खुद ड्रोन उड़ाकर घाट और आसपास के इलाकों का जायजा लिया। ड्रोन के जरिए संभावित रेत भंडारण और घाटों तक पहुंचने वाले रास्तों की निगरानी की गई। निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे रास्ते दिखाई दिए, जिनका इस्तेमाल अवैध रेत गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका थी। इसके बाद जेसीबी बुलाकर इन रास्तों को खुदवाकर बंद कराया गया।
अधिकारियों ने घाटों पर बनाई जा रही चौकियों का भी निरीक्षण किया। यहां 24 घंटे तैनात एसएएफ के सशस्त्र जवानों से एसपी ने बातचीत की और उन्हें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए। अधिकारियों के मुताबिक चंबल के 24 घाट संवेदनशील हैं। इनकी निगरानी के लिए एसएएफ की दो कंपनियों के करीब 130 जवान पेट्रोलिंग कर रहे हैं। पुलिस की मोबाइल पार्टियां भी लगातार गश्त कर रही हैं।
डीएफओ एचसी बघेल के मुताबिक पिछले चार दिनों से दिन और रात औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि अब तक किसी घाट पर अवैध रेत उत्खनन नहीं मिला है। बारिश का मौसम खत्म होने और फसल कटाई शुरू होने के साथ अवैध उत्खनन की आशंका बढ़ने के चलते निगरानी बढ़ाई गई है।
राजघाट पर घड़ियाल और कछुओं के अंडे देने वाले स्थान होने के कारण विशेष निगरानी रखी जा रही है। वहीं कुल्हाड़ा घाट पर एआई टावर लगाया गया है, जो संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर मोबाइल के जरिए सूचना देने में सक्षम बताया गया है। इसके अलावा चंबल घाटों की निगरानी मजबूत करने के लिए 16 चेक पोस्ट भी तैयार की जा रही हैं।
ड्रोन निगरानी, जेसीबी से रास्ते बंद और घाटों पर जवानों की तैनाती से साफ है कि प्रशासन अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा रहा है। अब देखना होगा कि यह सख्ती आगे कितनी प्रभावी साबित होती है।