आदिवासी जमीन पर मिट्टी की लीज का आरोप, तहसीलदार को ज्ञापन देकर आंदोलन की चेतावनी
आदिवासी परिवारों की जमीन से जुड़ा मामला सामने आया है। एमपी के सागर संभाग के छतरपुर जिले के घुवारा तहसील के ग्राम पनया में आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि उनकी उपजाऊ जमीन पर खनिज विभाग ने मिट्टी उत्खनन के लिए लीज जारी कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर कई पीढ़ियों से खेती कर परिवार का भरण-पोषण किया जा रहा है,
वहां अब मिट्टी उत्खनन की अनुमति दिए जाने से दर्जनों आदिवासी परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। मामले को लेकर आदिवासियों ने तहसीलदार घुवारा को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है और आंदोलन की चेतावनी दी है। मामला ग्राम पनया और मौजा घुवारा स्थित खसरा नंबर 3949 की भूमि से जुड़ा बताया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, आदिवासी परिवार करीब 100 वर्षों से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि पीढ़ियों से इसी जमीन पर खेती कर परिवार का गुजारा चल रहा है और भूमि को लेकर वे लंबे समय से अर्थदंड भी जमा करते आ रहे हैं।
आदिवासी परिवारों का आरोप है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना खनिज विभाग ने इसी जमीन पर मिट्टी उत्खनन के लिए लीज जारी कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि लीज प्रक्रिया से पहले उन्हें न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही कोई नोटिस मिलने की बात सामने आई। ग्रामीणों ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कथित तौर पर भूमाफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत से लीज हासिल की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आदिवासी परिवारों का कहना है कि यदि जमीन पर उत्खनन शुरू हुआ तो खेती प्रभावित होगी और उनके सामने रोजगार तथा आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
जयस जिला अध्यक्ष कैलाश आदिवासी ने कहा कि आदिवासी परिवारों ने मेहनत कर इस जमीन को खेती योग्य बनाया है। उनका आरोप है कि बिना सूचना और नोटिस के जमीन पर मिट्टी उत्खनन की लीज दे दी गई। फिलहाल आदिवासी परिवारों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच, लीज प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करने और अपनी आजीविका से जुड़ी जमीन की सुरक्षा की मांग की है। अब प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और लीज की प्रक्रिया किन नियमों के तहत हुई, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं ग्रामीणों ने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।