मानसून कम मेहरबान तो जलसंकट का मंडराया ख़तरा, फसलों-पेयजल पर संकट,जिले को सूखाग्रस्त करने की मांग !
मानसून कई जगहों पर तो बेहद मेहरबान था कई ऐसे भी जिले हैं जहां उम्म्मीद के मुताबिक कम बारिश हुई है जिससे किसानों चिंताएं बढ़ी हुई हैं। एक तो फसलों की चिंता सता रही है वहीं दूसरी तरफ पेयजल संकट के खतरे का अंदेशा जताया जा रहा है। जिससे अब जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की जा रही है। क्योंकि धार जिले में इस सीजन 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जिसका असर खेतों,तालाबों, बांधों के अलावा जल स्त्रोतों पर दिखाई देने लगा है। मानसून की विदाई हो चुकी है। जिससे पेयजल और सिंचाई की समस्या है
बताया गया की धार जिले में इस मानसून सीजन में अब तक करीब 6902.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जबकि पिछले साल अब तक 11,973.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इस बार 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। जिसका असर जिले के जलस्रोतों पर पड़ा है। कई तालाबों में पर्याप्त पानी नहीं भर पाया। तो कुछ इलाकों में जलस्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है।
कम बारिश से किसानों को रबी सीजन की फसलों की चिंता सताने लगी है। किसानों की माने तो बारिश कम होने से तालाबों में पानी कम है कई क्षेत्रों में ट्यूबवेल भी अभी से कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं। पानी की उपलब्धता कम रही तो रबी की फसल प्रभावित हो सकती है।
बताया गया की गेहूं की फसल में सिंचाई की जरूरत अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। जबकि चने की फसल कम पानी में भी तैयार हो जाती है।
वहीं फसलों के अलावा गर्मी के मौसम में पेयजल व्यवस्था पर भी संकट पड़ सकता है। इसलिए जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की गयी है।------