सागर- खुरई के स्कूल में मिड-डे मील पर सवाल, 3 महीने में सिर्फ 41 दिन बंटा भोजन| SAGAR TV NEWS |
सागर जिले के खुरई के चतरा टांडा स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल में बच्चों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। स्कूल में 26 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन जुलाई से सितंबर तक तीन महीने के दौरान सिर्फ 41 दिन मध्यान्ह भोजन बांटे जाने की जानकारी सामने आई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सितंबर महीने में बच्चों को महज 6 दिन ही भोजन दिए जाने का रिकॉर्ड सामने आया है। अब सवाल उठ रहा है कि बाकी दिनों के लिए आवंटित खाद्यान्न और राशि का क्या हुआ? मामला खुरई के चतरा टांडा स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल का है। यहां जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने में मध्यान्ह भोजन वितरण के आंकड़ों को लेकर अनियमितता की बात सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक, जुलाई में 17 दिन, अगस्त में 18 दिन और सितंबर में सिर्फ 6 दिन बच्चों को मध्यान्ह भोजन बांटा गया। इस तरह तीन महीनों में कुल 41 दिन ही भोजन वितरण दर्ज है। स्कूल में कुल 26 बच्चे दर्ज हैं और बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सृजन स्व सहायता समूह के पास है। लेकिन भोजन वितरण के सामने आए आंकड़ों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल प्रभारी बारेलाल कुशवाहा का कहना है कि स्व सहायता समूह के संचालक को नियमित रूप से मध्यान्ह भोजन वितरित करने के लिए कई बार हिदायत दी गई। इसके बावजूद तीन महीने में इतने कम दिनों का भोजन वितरण दर्ज होना कई सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन दिनों बच्चों को भोजन नहीं मिला, उन दिनों के लिए आवंटित खाद्यान्न और राशि का क्या हुआ? क्या उसका रिकॉर्ड स्कूल और संबंधित विभाग के पास मौजूद है? क्या वास्तव में भोजन नहीं बनाया गया या फिर रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी हुई? इन सभी सवालों के जवाब रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। मामले की जानकारी खुरई बीआरसी राजेंद्र सेंगर तक भी पहुंची है। उन्होंने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और शाला प्रभारी से इस संबंध में चर्चा की जाएगी। मध्यान्ह भोजन योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में तीन महीने में सिर्फ 41 दिन भोजन वितरण की जानकारी सामने आने के बाद अब रिकॉर्ड की जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि विभागीय जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और बच्चों को नियमित भोजन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।