Sagar- प्रसव के बाद आदिवासी महिला की मौत, 5 घंटे बाद पहुंची 108 एंबुलेंस
सागर जिले के मालथौन से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। नोनिया गांव में प्रसव पीड़ा से जूझ रही आदिवासी महिला ललिता आदिवासी को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के आरोप हैं। परिजनों के मुताबिक, महिला ने घर पर ही बच्चे को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव के चलते उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद करीब पांच घंटे तक 108 एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। जानकारी के मुताबिक, बुधवार शाम ललिता को पेट में दर्द होने पर परिजन बरौदिया कलां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि जांच के बाद उन्हें बताया गया कि प्रसव में अभी करीब दो महीने का समय है। इसके बाद परिवार ललिता को वापस गांव ले आया।
अगली सुबह अचानक ललिता की प्रसव पीड़ा बढ़ गई। करीब 7 बजे घर पर ही प्रसव हुआ। परिजनों के मुताबिक, बच्चे को जन्म देने के बाद ललिता की तबीयत बिगड़ गई और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। इसके बाद 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस के लिए संपर्क करने पर उन्हें इंतजार करने की बात कही गई, लेकिन काफी समय तक एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची। करीब पांच घंटे बाद एंबुलेंस पहुंची, जिसके बाद बेसुध महिला और नवजात को मालथौन अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने ललिता को मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद अस्पताल परिसर के बाहर का एक दृश्य भी सामने आया, जहां परिजन नवजात को लेकर परेशान बैठे नजर आए। परिजनों का कहना है कि महिला की मौत के बाद नवजात को भर्ती कराने को लेकर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। ललिता के परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्र की जांच व्यवस्था और आपातकालीन एंबुलेंस सेवा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर उपचार और अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मिल जाती, तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी।
वहीं मालथौन बीएमओ डॉ. रामजी ठाकुर ने बताया कि महिला की डिलीवरी घर पर हुई थी और उसे अस्पताल मृत अवस्था में लाया गया। उन्होंने कहा कि 108 एंबुलेंस समय पर नहीं मिलने की जानकारी उन्हें नहीं है। यदि स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई है तो मामले की जांच कराई जाएगी। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और एंबुलेंस पहुंचने में देरी क्यों हुई।