Sagar- नर्मदा से जुड़ेगी सुनार तो बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर, सागर-दमोह में सिंचाई का बढ़ेगा दायरा
बुंदेलखंड की पहचान लंबे समय से पानी की कमी और सीमित सिंचाई संसाधनों से जूझते कृषि क्षेत्र के रूप में रही है। पर्याप्त जल उपलब्धता नहीं होने के कारण यहां खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर रही है। यही वजह है कि उपजाऊ जमीन और मेहनतकश किसानों के बावजूद बुंदेलखंड कृषि क्षेत्र में पंजाब और हरियाणा जैसी समृद्धि हासिल नहीं कर पाया। अब जल परियोजनाओं के विस्तार के साथ इस तस्वीर के बदलने की उम्मीद दिखाई देने लगी है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के बाद अब सागर और दमोह जिले के लिए नर्मदा-सुनार लिंक की चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। रहली विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव लंबे समय से सुनार नदी को नर्मदा से जोड़ने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने हाल ही में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट से मुलाकात कर परियोजना से जुड़े प्रस्ताव और संभावनाओं पर चर्चा की। मुलाकात के दौरान मंत्री सिलावट ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल से भी इस विषय पर चर्चा की।
प्रस्ताव के अनुसार नर्मदा के पानी को लिफ्ट कर सुनार नदी में पहुंचाने की योजना पर काम किया जा सकता है। रहली से नर्मदा के बरमान घाट की दूरी करीब 80 किलोमीटर बताई जाती है। यदि यह योजना आकार लेती है, तो बरसात के बाद पानी के लिए तरसने वाली सुनार नदी में सालभर पानी उपलब्ध रहने की संभावना बनेगी।
सुनार नदी सागर जिले के टड़ा केसली क्षेत्र से निकलकर रहली, गढ़ाकोटा और हटा होते हुए आगे बढ़ती है। ऐसे में इसके जलस्तर में स्थायी सुधार का सीधा असर सागर और दमोह के बड़े कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है।
सिंचाई का दायरा बढ़ने से किसानों को बारिश पर निर्भरता कम करने, एक से अधिक फसल लेने और खेती में नई तकनीक अपनाने का अवसर मिलेगा। खेतों में पानी पहुंचेगा तो केवल फसल उत्पादन ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और किसानों की आय को भी नई गति मिल सकती है। यही वजह है कि नर्मदा-सुनार लिंक की योजना को बुंदेलखंड के लिए महज नदी जोड़ने की परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने की संभावित पहल के तौर पर देखा जा रहा है।