सागर- खुरई के कुमरोल स्कूल में भवन का संकट, 153 विद्यार्थियों पर पर्याप्त कमरे नहीं; एक साथ लग रही कई कक्षाएं
एमपी के सागर जिले के खुरई ब्लॉक के कुमरोल गांव से शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। गांव के स्कूल में भवन और पर्याप्त कमरों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पहली से दसवीं कक्षा तक कुल 153 विद्यार्थी स्कूल में दर्ज हैं, लेकिन बच्चों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं। हालात यह हैं कि एक ही कमरे में दो से तीन कक्षाएं एक साथ संचालित करनी पड़ रही हैं। कुमरोल के स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक 70 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वहीं छठवीं से आठवीं तक 50 और नौवीं-दसवीं कक्षा में 33 विद्यार्थी दर्ज हैं। यानी स्कूल में पहली से दसवीं तक कुल 153 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
स्कूल में सबसे बड़ी समस्या प्राथमिक कक्षाओं के लिए उपलब्ध कमरों की है। प्राथमिक स्कूल के पास सिर्फ दो कमरे और एक दहलान है। कमरों की कमी के चलते कई कक्षाएं एक साथ लगाई जाती हैं। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान न सिर्फ जगह की परेशानी होती है, बल्कि एक ही स्थान पर अलग-अलग कक्षाओं के संचालन से पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित होता है। वहीं स्कूल का मिडिल सेक्शन भी भवन की समस्या से जूझ रहा है। बताया जा रहा है कि मिडिल स्कूल का भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण बंद है। इसके चलते विद्यार्थियों को उपलब्ध सीमित संसाधनों में ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।
खास बात यह है कि कुमरोल के स्कूल का हाईस्कूल में उन्नयन वर्ष 2015 में हो चुका है। हाईस्कूल स्तर की कक्षाएं शुरू होने के बाद विद्यार्थियों की संख्या और कक्षाओं की जरूरत बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद स्कूल के लिए अतिरिक्त भवन और पर्याप्त कमरों की व्यवस्था नहीं हो सकी। कमरों की कमी के कारण स्कूल प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ रहा है। कई कक्षाओं का संचालन पंचायत भवन में भी करना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों और अभिभावकों की मांग है कि स्कूल की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर जल्द अतिरिक्त कमरों और नए भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। फिलहाल 153 विद्यार्थियों वाले इस स्कूल में भवन की कमी शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग विद्यार्थियों की इस समस्या का समाधान कब तक करता है।