Sagar - पितृपक्ष के अंतिम 5 दिन विशेष, एकादशी से अमावस्या तक तर्पण करने से मिलता है पूरे दिनों का पुण्य लाभ
पितृपक्ष के 15 दिनों में अंतिम पांच दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माने गए हैं। एकादशी से पितृमोक्ष अमावस्या तक आने वाली इन पांच तिथियों को पंच प्राण तिथियां कहा जाता है। कर्मकांडी ब्राह्मणों के अनुसार इन दिनों पितरों के निमित्त तर्पण करने से पूरे 15 दिन के तर्पण का पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है। साथ ही शुरुआती दिनों में श्राद्ध और तर्पण कर्म के दौरान हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगने का भी यह विशेष अवसर माना गया है। महालय के आरंभ के साथ ही झील स्थित घाट पर हजारों लोगों ने पितरों के निमित्त तर्पण कर रहे हैं
सागर में चना टोरिया स्थित नर्मदेश्वर धाम के पुजारी पंडित दीपक पटेरिया ने बताया अष्टमी पर गर्भ में ही मृत्यु को प्राप्त हुए शिशुओं के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। नवमी सौभाग्यवती महिलाओं के लिए तथा दशमी विधवा, तलाकशुदा और निसंतान महिलाओं के निमित्त मानी गई है। मान्यता के अनुसार इन तिथियों पर तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से संबंधित पितरों की मुक्ति के लिए प्रार्थना की जाती है। अंतिम पांच दिन केवल तर्पण की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पूरे पितृपक्ष में किए गए कर्मों के स्मरण, क्षमा-प्रार्थना और ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर हैं।