इल्लियों के प्रकोप से फसलें प्रभावित, टमाटर-मिर्ची से लेकर मक्का तक नुकसान
एमपी के छिंदवाड़ा जिले में मौसम के बदलते मिजाज के साथ फसलों में कीट और वायरस के प्रकोप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में टमाटर, मिर्ची और अन्य सब्जी फसलों के साथ मक्का की फसल भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। किसान फसल बचाने के लिए लगातार महंगी दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन कई जगह इल्लियों और दूसरे कीटों पर दवाओं का अपेक्षित असर नहीं होने की शिकायत है।
किसानों के मुताबिक, इस सीजन में मौसम लगातार बदलता रहा। फसल को जिस समय पर्याप्त पानी की जरूरत थी, उस दौरान बारिश नहीं होने से बढ़वार प्रभावित हुई। इसके बाद तेज बारिश और हवाओं से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा। अब तेज धूप और उमस के बीच सुबह-रात की नमी के बाद अचानक तापमान बढ़ने से सब्जी फसलों में कीट प्रकोप बढ़ने की बात किसान बता रहे हैं।
सिवनी रोड क्षेत्र के किसान सुरेंद्र चौरे के मुताबिक, उनके पास करीब 16 एकड़ जमीन है। उन्होंने लगभग 8 एकड़ में मक्का और बाकी जमीन में टमाटर, फर्रास और मिर्ची की फसल लगाई है। किसान का कहना है कि सब्जी फसलों में वायरस का असर दिखाई दे रहा है और कई पौधे खराब होकर धीरे-धीरे सूख रहे हैं। सुरेंद्र चौरे के मुताबिक, अब तक बीज, खाद, दवाइयों, सिंचाई और मजदूरी पर करीब 5 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद फसल की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनका अनुमान है कि सामान्य परिस्थितियों में जहां करीब 500 क्विंटल तक मक्का उत्पादन होता था, इस बार उत्पादन घटकर करीब 200 क्विंटल रह सकता है।
किसानों का कहना है कि टमाटर और अन्य सब्जियों में इल्लियों का प्रकोप बढ़ने से दवाइयों और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। वहीं उत्पादन कम होने से लागत निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में कृषि विभाग की टीम भेजकर फसलों का सर्वे कराने की मांग की है। साथ ही कृषि विशेषज्ञों से सलाह और प्रभावी दवाइयों की जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है। किसानों ने मांग की है कि सर्वे के बाद वास्तविक नुकसान का आकलन कर नियमानुसार राहत और मुआवजा दिया जाए, ताकि बढ़ती खेती की लागत और कम उत्पादन के कारण किसानों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कुछ राहत मिल सके।