हिंदू-मुस्लिम समेत हर धर्म के लोग निभा रहे अपनी जिम्मेदारी, खुद हटा रहे अपने घरों-धार्मिक स्थलों को
आगामी साल 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ महाकुम्भ का आगाज़ होगा। जिसकी तैयारियां चोरों शोरों से की जा रही हैं। इस आयोजन में देश दुनिया से लाखों करोड़ों श्रद्धालु आने की बात कही जा रही है। जिसको लेकर सड़कों का चौड़ीकरण, सुगम आवागमन, यातायात व्यवस्था और अन्य निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है। इस सब में ख़ास बात ये है की हिंदू-मुस्लिम समेत हर समाज के लोग विकास के इस महाअभियान में अपना योगदान दे रहे हैं। ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगम आवागमन और उन्हें बेहतर व्यवस्थाएं मिल सकें।
सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले भवनों और धार्मिक संरचनाओं के प्रभावित हिस्सों को हटाने सभी समाज के लोग सहयोग दे रहे हैं। कुछ अपने निजी भवन का हिस्सा हटा रहे हैं कुछ धार्मिक संरचना का हिस्सा, खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पैतृक घर के हिस्से को तोड़ने की शुरुआत की थी।
दरअसल उज्जैन के अब्दालपुरा क्षेत्र में खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक 700 मीटर से ज्यादा मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना है। इस परियोजना की जद में 270 से ज्यादा भवन प्रभावित हो रहे हैं। जिसमे मुख्यमंत्री का पैतृक मकान और उनकी बहन कलावती यादव का मकान भी शामिल है। बीते 27 सितंबर को सीएम खुद अपने पैतृक घर पहुंचे थे। जहां विधि-विधान से पूजन के बाद उन्होंने अपने हाथ से गैंती चलाकर सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत की थी। इसी घर में उनका बचपन बीता है।
वहीं कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तरफ जाने वाले मार्ग के चौड़ीकरण की योजना में कई धार्मिक स्थल प्रभावित क्षेत्र में आए हैं। कई संरचनाओं के हिस्से आपसी सहमति से हटाए भी गए हैं। इसी तरह शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई इसी सड़क चौड़ीकरण परियोजना से जुड़ी है। जिस पर सहमति भी बनी लेकिन कार्यवाई के दौरान भीड़ इकठ्ठा हुई और बवाल मच गया। पुलिस को भी आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। बल प्रयोग भी किया गया। हालांकि बाद में प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच सहमति की बात भी सामने आई थी। बताया गया की सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य किसी धार्मिक स्थल को निशाना बनाना नहीं बल्कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना है।
हिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाई, जैन या किसी भी धर्म और समाज से आने वाला नागरिक, सिंहस्थ उज्जैन की साझा विरासत और साझा जिम्मेदारी है। जो आने वाले सिंहस्थ को सिर्फ भव्य आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता और सद्भाव की मिसाल भी बना सकती है।------