Sagar- शाहगढ़ की उजनेठी पंचायत में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, काम अधूरे-राशि आहरण का दावा
सागर जिले के शाहगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत उजनेठी में विकास कार्यों के नाम पर कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों की ओर से जनपद पंचायत शाहगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शिकायत देकर पंचायत के कार्यों की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में सरपंच पानबाई पति मगन लोधी और सचिव रामस्वरूप अहिरवार पर पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों के दौरान विभिन्न कार्यों के लिए राशि आहरित करने के बावजूद मौके पर काम नहीं कराने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई कार्यों की राशि निकाल ली गई, लेकिन निर्माण स्थल पर काम नहीं हुआ और कुछ मामलों में मूल्यांकन या एमबी दर्ज होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में बस स्टैंड के पास सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए करीब 3 लाख 50 हजार रुपए आहरित करने का दावा किया गया है, जबकि मौके पर कार्य नहीं होने की बात कही गई है।
इसके अलावा ग्राम भरतपुर में गणेश मंदिर से नाले की ओर नाली निर्माण, स्वच्छता मद से नाडेप और सोक पिट-लीच पिट निर्माण, सामुदायिक भवनों की मरम्मत और पुताई जैसे कार्यों में भी राशि खर्च होने के बावजूद काम नहीं होने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में पेयजल टैंकरों की मरम्मत और पानी की व्यवस्था पर लाखों रुपए खर्च करने का भी आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार पंचायत के छह टैंकरों में से केवल दो ही चालू हालत में हैं। वहीं, उजनेठी और भरतपुर में पेयजल टंकी, चौपाल और अन्य निर्माण कार्यों की राशि आहरित करने के बावजूद काम शुरू नहीं होने का दावा किया गया है।
गांव की साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई के नाम पर राशि निकाली गई, लेकिन भरतपुर में सड़कों पर गंदा पानी और कीचड़ जमा है। स्ट्रीट लाइटें भी बंद होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में सीसी रोड की गुणवत्ता और सरकारी जमीन पर कब्जे से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। एक सड़क निर्माण के छह महीने बाद उखड़ने का दावा किया गया है।
वहीं, चारागाह के लिए इस्तेमाल की गई करीब ढाई एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा कर खेती करने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने पंचायत के सभी कार्यों, भुगतान और निर्माण की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और पंचायत के कार्यों में वास्तविक स्थिति क्या है।