अतिवृष्टि से फसलें बर्बाद होने का दावा, उड़द-सोयाबीन-मक्का के नुकसान का सर्वे और मुआवजे की मांग
सागर जिले के रहली विधानसभा क्षेत्र में सितंबर महीने के दौरान हुई लगातार बारिश और तेज हवाओं से फसलों को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है। किसानों की परेशानी को लेकर भारतीय शक्ति चेतना पार्टी किसान मोर्चा की ओर से मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम राजस्व विभाग को ज्ञापन सौंपकर जल्द फसल सर्वे कराने और नियमानुसार राहत राशि दिलाने की मांग की गई है। रहली क्षेत्र में हालिया बारिश और तेज हवाओं से मक्का, उड़द और सोयाबीन की फसलों को नुकसान की खबरें सामने आई हैं और प्रशासन की ओर से फसल क्षति के आकलन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि खरीफ सीजन 2026 में रहली विकासखंड के विभिन्न राजस्व ग्रामों में किसानों ने उड़द, सोयाबीन और मक्का की फसल बोई थी। शुरुआती समय में फसलें अच्छी स्थिति में थीं, लेकिन सितंबर में लगातार हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बनी और फसलों को नुकसान पहुंचा।
संगठन का दावा है कि उड़द की फसल को अत्यधिक बारिश और जलभराव से करीब 100 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। वहीं, सोयाबीन की फसल में खेतों में पानी भरने से पौधों की जड़ें गलने, पत्तियां पीली पड़ने और झड़ने के कारण 80 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने का दावा किया गया है। इसी तरह मक्का की फसल भी तेज हवा और बारिश की चपेट में आई। ज्ञापन के मुताबिक, दाना भरने की अवस्था में पहुंच चुके मक्का के पौधे तेज हवाओं के कारण खेतों में गिर गए। इसके बाद खेतों में पानी भरने से कई जगह भुट्टे भी खराब होने का दावा किया गया है। सागर जिले के रहली क्षेत्र में तेज बारिश और हवाओं से मक्का समेत अन्य फसलों के प्रभावित होने की रिपोर्ट पहले भी सामने आ चुकी है।
किसान मोर्चा ने मांग की है कि राजस्व विभाग द्वारा खेतों का शीघ्र सर्वे कराया जाए और पात्र किसानों को आरबीसी 6-4 के तहत नियमानुसार फसल क्षति सहायता उपलब्ध कराई जाए। मध्य प्रदेश सरकार की ई-सेवा व्यवस्था में भी आरबीसी 6-4 के तहत फसल क्षति सहायता का प्रावधान दर्ज है। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसानों की फसलों का कृषि विभाग और संबंधित बीमा कंपनी के माध्यम से सर्वे कराकर नियमानुसार क्लेम दिलाने की मांग की गई है। ज्ञापन में आगामी रबी सीजन के लिए गेहूं, चना, मसूर और सरसों का बीज उपलब्ध कराने, सहकारी समितियों के माध्यम से खाद की सुगम व्यवस्था करने और किसानों से जुड़े पुराने बिजली बिलों पर राहत देने की मांग भी उठाई गई है। संगठन ने प्रशासन से किसानों के हित में समय रहते कार्रवाई की मांग की है।