मकान से 400 बोरी खाद बरामद, रात 12 बजे प्रशासन की दबिश; 350 बोरी DAP मिलने से मचा हड़कंप
एमपी के गुना जिले में खाद की किल्लत के बीच एक निजी मकान से सैकड़ों बोरी उर्वरक मिलने का मामला सामने आया है। बमोरी के बांसखेड़ी पाटन में प्रशासन ने सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे कार्रवाई करते हुए एक मकान से करीब 400 बोरी खाद बरामद की। इनमें करीब 350 बोरी DAP होने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी मात्रा में खाद मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के मुताबिक, प्रशासन को निजी मकान में बड़ी मात्रा में खाद रखे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद बमोरी के नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट जयप्रकाश गौतम मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद मकान मालिक चंदन लाल से दरवाजा खुलवाया गया। इसके बाद प्रशासनिक टीम ने मकान की तलाशी शुरू की।
तलाशी के दौरान मकान के अंदर बड़ी संख्या में खाद की बोरियां रखी मिलीं। मौके पर करीब 350 बोरी DAP और अन्य उर्वरक समेत कुल लगभग 400 बोरी खाद मिलने की जानकारी सामने आई। सुरक्षा और तलाशी की कार्रवाई के लिए डायल-112 पुलिस बल को भी मौके पर बुलाया गया। अब सबसे बड़ा सवाल खाद के स्रोत और उसके दस्तावेजों को लेकर है।
पूछताछ में संबंधित व्यक्ति ने खाद राजस्थान के बारां जिले से लाने की बात बताई है। हालांकि, खाद कहां से खरीदी गई, किसके नाम पर खरीदी गई और इसके बिल, परिवहन तथा भंडारण से जुड़े दस्तावेज वैध हैं या नहीं, इसकी जांच की जानी बाकी है। मामले में खाद के स्वामित्व को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आई हैं। बताया गया कि शुरुआत में पत्नी ने खाद को किसी दुकानदार का बताया, जबकि पति ने इसे अपना और रिश्तेदारों का बताया। इन विरोधाभासी दावों के चलते प्रशासन अब वास्तविक स्वामित्व की जांच कर रहा है।
कार्रवाई के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं। बताया गया है कि विभाग को सूचना दी गई थी, लेकिन मौके पर अधिकारी नहीं पहुंचे। हालांकि, इस संबंध में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। मौके पर नायब तहसीलदार की मौजूदगी में पंचों के समक्ष पंचनामा, जब्ती और सुपुर्दगी की कार्रवाई की गई। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इतनी बड़ी मात्रा में DAP निजी मकान तक कैसे पहुंची और क्या इसके भंडारण से जुड़े नियमों का पालन किया गया था। किसानों की खाद की जरूरत के बीच सामने आए इस मामले ने खाद वितरण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।