उफनती नदी के बीच एंबुलेंस बनी प्रसूति गृह, अस्पताल पहुंचने से पहले गूंजी किलकारी | SAGAR TV NEWS |
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के आदिवासी बहुल कल्दा पठार से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के हालात पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजादोह गांव में सड़क और पक्के पुल के अभाव में एक 108 एंबुलेंस उफनती नदी के रपटे पर घंटों फंसी रही। इसी दौरान प्रसूता की हालत बिगड़ने पर एंबुलेंस में मौजूद स्वास्थ्य टीम ने परिजनों की मदद से वाहन के भीतर ही प्रसव कराया। राहत की बात रही कि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
दरअसल, बीजादोह गांव निवासी रोशनी आदिवासी को प्रसव पीड़ा होने पर देर रात करीब एक बजे 108 एंबुलेंस बुलाई गई थी। स्वास्थ्य टीम प्रसूता को लेकर सलेहा स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना हुई।
लेकिन रास्ते में सलेहा मार्ग के रपटे पर नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव को देखते हुए एंबुलेंस चालक ने वाहन रोक दिया। पानी का बहाव कम होने का इंतजार किया जा रहा था, लेकिन इसी बीच प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी।
स्थिति को देखते हुए एंबुलेंस में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने परिजनों की मदद से वाहन के अंदर ही प्रसव कराने का फैसला लिया। उफनती नदी और मुश्किल हालात के बीच एंबुलेंस में ही बच्चे की किलकारी गूंजी। रोशनी ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
जलस्तर कम नहीं होने के कारण एंबुलेंस को प्रसूता और नवजात के साथ वापस गांव लौटना पड़ा। घटना ने एक बार फिर कल्दा पठार के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत को सामने ला दिया है।
स्थानीय सरपंच होशियार सिंह के मुताबिक, पक्के पुल के अभाव में हर साल मरीजों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है।
स्थानीय युवक कमलेश ओमरे ने बताया कि इलाके में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण नदी में पानी बढ़ गया है, तेज हवा चल रही है और ठंड भी बढ़ गई है।
फिलहाल मां और नवजात दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं। लेकिन इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि बारिश के मौसम में ग्रामीणों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के लिए स्थायी पुल और सड़क की व्यवस्था कब होगी।