सीए का सपना अधूरा रहा, MPPSC में मिली मंजिल; किसान के बेटे बने असिस्टेंट प्रोफेसर
जिंदगी में कई बार कोई सपना पूरा नहीं होता, लेकिन असफलता के बाद रास्ता बदलकर लगातार मेहनत की जाए तो मंजिल जरूर मिल सकती है। एमपी के रायसेन जिले के ग्राम ऊषापुर के रहने वाले राजीव कुशवाहा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। किसान परिवार से आने वाले राजीव ने चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी CA बनने का सपना देखा था। उन्होंने इसके लिए कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की दिशा बदली और उच्च शिक्षा के क्षेत्र को चुना। मेहनत और लगातार प्रयास के बाद राजीव का चयन MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर कॉमर्स परीक्षा-2024 की मेरिट लिस्ट में हुआ है। उनकी इस सफलता से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।
राजीव के पिता निर्भय सिंह सिलवानी तहसील के ऊषापुर गांव में किसान हैं। राजीव ने कक्षा छठी से बारहवीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, बाड़ी से की। उनका कहना है कि नवोदय विद्यालय ने उन्हें अनुशासन के साथ मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना और हार नहीं मानना सिखाया। 12वीं के बाद राजीव ने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से बीकॉम और एमकॉम फाइनेंस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने CA बनने की तैयारी शुरू की। उन्होंने CA-CPT और CA-IPCC ग्रुप-1 की परीक्षा पास की, लेकिन कई प्रयासों के बाद CA की तैयारी छोड़नी पड़ी। यह उनके लिए मुश्किल दौर था, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखी।
कॉमर्स विषय में अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए राजीव ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने UGC-NET की तैयारी शुरू की और पांच बार NET क्वालीफाई किया। जून 2026 में उन्होंने कॉमर्स विषय में NET-JRF भी हासिल किया। इसके बाद उन्होंने MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा की तैयारी की। MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा-2022 में वह लिखित परीक्षा और इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा तैयारी शुरू कर दी।
राजीव ने लिखित परीक्षा की तैयारी में सेल्फ स्टडी को अपना आधार बनाया। उनका कहना है कि CA की तैयारी के दौरान पढ़े विषय और अध्ययन सामग्री भी आगे की परीक्षाओं में उनके लिए उपयोगी साबित हुई। राजीव अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को देते हैं। उनका संदेश है कि परिस्थितियां कितनी भी मुश्किल क्यों न हों, हार नहीं माननी चाहिए और मंजिल मिलने तक कोशिश जारी रखनी चाहिए।