Sagar -पितृपक्ष शुरू होते ही खुरई के घाटों पर उमड़ी आस्था, श्रद्धालुओं ने किया पितरों का तर्पण
पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही खुरई में पितरों के तर्पण और श्राद्ध का सिलसिला शुरू हो गया है। सुबह से ही श्रद्धालु अपने पूर्वजों को याद कर उनके निमित्त तर्पण करने के लिए अलग-अलग घाटों पर पहुंच रहे हैं। सागर जिले के खुरई के बड़े तालाब स्थित मंदिर घाट के अलावा बीना नदी और नरेन नदी के घाटों पर भी लोगों ने विधि-विधान के साथ तर्पण किया।
बड़े तालाब के मंदिर घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों ने नदी और तालाब के किनारे धार्मिक विधि के अनुसार तर्पण कर अपने पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
पंडित पप्पू रिछारिया ने बताया कि तर्पण की धार्मिक प्रक्रिया में कुश, अक्षत, जौ और काले तिल का उपयोग किया जाता है। मान्यता के अनुसार तर्पण के माध्यम से पितरों का स्मरण किया जाता है और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।
उन्होंने बताया कि तर्पण के बाद पितरों से प्रार्थना करने और अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगने की भी परंपरा है। पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध और अन्य धार्मिक कर्मकांड करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु की सही तिथि ज्ञात नहीं हो तो अश्विन अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जा सकता है। वहीं पिता के लिए अष्टमी, माता के लिए नवमी और दुर्घटना में मृत्यु होने पर चतुर्दशी के दिन श्राद्ध करने का विधान बताया गया है।
पितृपक्ष के दौरान खुरई के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद कर रहे हैं और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं।