Sagar -बीना में पितृपक्ष की शुरुआत, मोतीचूर घाट पर उमड़ी आस्था; श्रद्धालुओं ने किया पितरों का तर्पण
पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही बीना में श्रद्धा और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है। पूर्णिमा श्राद्ध के साथ शुरू हुए पितृपक्ष के पहले दिन श्रद्धालु अपने पूर्वजों को याद कर तर्पण और श्राद्धकर्म के लिए घाटों पर पहुंच रहे हैं। सागर जिले के बीना के देव रघुनाथ बड़ा मंदिर स्थित मोतीचूर नदी घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है।
मोतीचूर नदी घाट पर पितृपक्ष के पहले दिन श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ अपने पितरों का तर्पण किया। घाट पर पंडित अखिलेश तिवारी और पंडित कैलाश मिश्रा द्वारा श्रद्धालुओं को श्राद्धकर्म और तर्पण कराया जा रहा है। लोग अपनी-अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।
हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, ब्राह्मण भोज और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि ज्ञात होती है, उनका श्राद्ध उसी तिथि पर किया जाता है। वहीं जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है।
पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पूर्वजों को याद कर उनकी आत्मिक शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस बार 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृपक्ष की शुरुआत हुई है और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।
मोतीचूर नदी घाट पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए पितृपक्ष केवल धार्मिक कर्मकांड का अवसर नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा व आभार व्यक्त करने का भी समय है।
सुबह से घाट पर धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालु अपने पितरों को जल अर्पित कर रहे हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना कर रहे हैं।