करोड़ का सीवर प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में, सिंधिया ने जताई नाराजगी, अब MPUDC संभालेगा जिम्मेदारी
शहर की सीवर व्यवस्था को सुधारने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करीब ₹113 करोड़ की लागत वाली सीवर परियोजना को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नाराजगी जताई है। दिशा समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा में सिंधिया ने परियोजना की स्थिति और उसमें सामने आई अनियमितताओं को लेकर असंतोष व्यक्त किया।
एमपी के शिवपुरी जिले में सिंधिया ने पुराने और नए सीवर सिस्टम की तुलना करते हुए कहा कि उनके दादा माधवराव महाराज प्रथम के समय शिवपुरी में करीब 15 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाई गई थी, जिसका कुछ हिस्सा आज भी चालू है। इसके मुकाबले आधुनिक तकनीक और बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद नई सीवर व्यवस्था अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर पा रही है।
सिंधिया के मुताबिक, अब परियोजना से जुड़े काम को एमपी अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन यानी MPUDC को सौंपने की तैयारी है, ताकि सीवर व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से दुरुस्त किया जा सके और शहरवासियों को बेहतर सुविधा मिल सके। सीवर परियोजना को लेकर मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, परियोजना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी विचाराधीन है। वहीं आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ सहित अन्य स्तरों पर शिकायतों और जांच का भी उल्लेख सामने आया है।
इधर, कांग्रेस ने भी सीवर परियोजना को लेकर सवाल उठाए हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित अग्रवाल ने परियोजना में कथित अनियमितताओं की जांच कराने, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और सरकारी राशि की वसूली की मांग की है। हालांकि, ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिनकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। अब निगाहें इस बात पर हैं कि MPUDC को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद शिवपुरी की सीवर व्यवस्था में कितना सुधार आता है और परियोजना से जुड़े सवालों की जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है।