sagar- शादी, मातृत्व और जिम्मेदारियों के बीच दिव्या ने पूरा किया डॉक्टर बनने का सपना
अगर इरादे मजबूत हों और परिवार का साथ मिले, तो जिम्मेदारियां सपनों की राह में दीवार नहीं बनतीं। सागर की 28 वर्षीय दिव्या द्विवेदी की कहानी इसका उदाहरण है। शादी, मातृत्व और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच दिव्या ने अपने बचपन के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा किया और अब उनकी नियुक्ति जैसीनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर के पद पर हुई है। दिव्या बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं, लेकिन जिंदगी ने उनके सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दीं। पढ़ाई के दौरान उनके पिता शैलेंद्र मिश्रा का निधन हो गया। पारिवारिक परिस्थितियां बदलीं और महज 20 साल की उम्र में दिव्या की शादी जैसीनगर निवासी प्रांजल द्विवेदी से हो गई।
शादी के बाद भी दिव्या ने अपने सपने को अधूरा नहीं छोड़ा। उन्होंने पति और ससुराल वालों से दोबारा पढ़ाई शुरू कर NEET की तैयारी करने की इच्छा जताई। परिवार ने उनका साथ दिया और पति ने उन्हें तैयारी के लिए भोपाल भेजने का फैसला किया। दिव्या की सफलता में उनकी सास की भूमिका भी बेहद खास रही। वे दिव्या के साथ भोपाल गईं और जब दिव्या कोचिंग में पढ़ाई करती थीं, तब सास घर की जिम्मेदारियां संभालती थीं। इतना ही नहीं, वह दिव्या के लिए टिफिन भी तैयार करती थीं, ताकि पढ़ाई के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
इसी संघर्ष के दौर में दिव्या मां भी बनीं। तीन साल की बेटी की जिम्मेदारी, पढ़ाई और परिवार को संभालना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ती रहीं। आखिरकार मेहनत रंग लाई और अब दिव्या जैसीनगर CHC में मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं देंगी। दिव्या की कहानी सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि परिवार के सहयोग और दृढ़ संकल्प की भी मिसाल है। यह कहानी बताती है कि शादी और मातृत्व के बाद भी सपनों को पूरा करने की राह खुली रहती है, जरूरत होती है तो सिर्फ मजबूत इरादों और साथ देने वाले परिवार की।