पुल-रेलवे ट्रैक डूबे, रामघाट और गुप्त गोदावरी जलमग्न, चित्रकूट में बाढ़ का रौद्र रूप! मंदाकिनी उफान पर
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने चित्रकूट में हालात बिगाड़ दिए हैं। मंदाकिनी नदी समेत नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बाढ़ ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। एमपी के सतना के चित्रकूट-नयागांव का बड़ा पुल पानी में डूब गया है, जबकि तेज बहाव के चलते पुल की रैलिंग तक टूट गई। कई प्रमुख मार्गों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2003 में भी चित्रकूट ने ऐसी भीषण बाढ़ का सामना किया था, लेकिन इस बार हालात उससे भी ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं।
बाढ़ का असर सड़क के साथ रेलवे ट्रैक पर भी दिखाई दे रहा है। सतना-मानिकपुर रेलखंड में चितहरा रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पानी में डूब गया है। सुरक्षा को देखते हुए ट्रेनों की रफ्तार बेहद कम कर दी गई है। रेलवे कर्मचारी ट्रैक की लगातार निगरानी कर रहे हैं और स्थिति सुरक्षित मिलने के बाद ही ट्रेनों को आगे बढ़ाया जा रहा है। चित्रकूट और बिरसिंहपुर क्षेत्र में मंदाकिनी नदी इस मानसून में पांचवीं बार उफान पर है। निचले इलाकों में पानी भर गया है और कई स्थानों पर लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। सती अनसूया तीर्थ क्षेत्र और गुप्त गोदावरी में भी भारी जलभराव है। सुरक्षा के मद्देनजर गुप्त गोदावरी को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं, प्रसिद्ध रामघाट पूरी तरह जलमग्न हो गया है और कई दुकानें पानी की चपेट में आ गई हैं।
मझगवां क्षेत्र में भी बाढ़ जैसे हालात के बीच SDRF और होमगार्ड की टीमों ने मोर्चा संभाल लिया है। रेस्क्यू टीम ने नदी के तेज बहाव के बीच घरों में फंसे 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके अलावा पेंड्रा के पास नदी में फंसे दो ट्रक ड्राइवरों को भी रस्सी और लाइफ जैकेट की मदद से सुरक्षित निकाला गया।
हालात को देखते हुए सतना सांसद गणेश सिंह ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से फोन पर चर्चा की। उन्होंने राहत-बचाव कार्य तेज करने, NDRF की टीम और हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कराने का आग्रह किया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल चित्रकूट में राहत और बचाव अभियान जारी है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।