सागर-15 साल से बना मुक्तिधाम, लेकिन रास्ता आज तक नहीं! खेत की मेड़ पर अंतिम संस्कार को मजबूर ग्रामीण
सागर जिले के खुरई के बागथरी गांव से सिस्टम की उस तस्वीर ने सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां करीब 15 साल पहले मुक्तिधाम तो बना दिया गया, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए आज तक पक्का रास्ता नहीं बन पाया। इतना ही नहीं, बाद में जमीन की नाप हुई तो मुक्तिधाम की जमीन निजी भूमि में निकल गई। नतीजा यह है कि ग्रामीणों को अब अंतिम संस्कार के लिए खेत की मेड़ का सहारा लेना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में करीब एक किलोमीटर का रास्ता कीचड़ और पानी से लबालब हो जाता है और इस मुश्किल सफर के बाद ही अंतिम संस्कार हो पाता है।
तस्वीरें बागथरी गांव की हैं, जहां 70 वर्षीय गोपीलाल साहू के निधन के बाद उनके परिजनों और ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए करीब एक किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ा। बारिश के कारण खेतों में पानी भरा था और रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो चुका था। ऐसे हालात में किसी तरह खेत की मेड़ तक पहुंचकर अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में करीब 15 साल पहले मुक्तिधाम बनाया गया था। लेकिन बाद में जमीन की नाप हुई तो यह निजी भूमि में निकल गया। इसके बाद ग्रामीणों ने वहां जाना बंद कर दिया। अब खेत की मेड़ ही अंतिम संस्कार की जगह बन गई है।
यहां बारिश से बचने के लिए टीन का छोटा सा शेड बनाया गया है, लेकिन तेज बारिश होने पर तिरपाल का सहारा लेना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के मौसम में होती है, जब कीचड़ और पानी के बीच शव को अंतिम संस्कार की जगह तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम समय में किसी परिवार को इस तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने शासकीय जमीन पर नया मुक्तिधाम बनाने और वहां तक पक्का रास्ता तैयार कराने की मांग की है, ताकि बारिश के दिनों में भी अंतिम संस्कार के लिए लोगों को परेशानी न उठानी पड़े।
वहीं पंचायत सचिव राकेश ने बताया कि नए मुक्तिधाम के लिए शासकीय जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कराया जाएगा। अब ग्रामीणों को इंतजार है कि प्रस्ताव कब स्वीकृत होगा और कब उन्हें ऐसा मुक्तिधाम मिलेगा, जहां तक पहुंचने के लिए खेत की मेड़ और कीचड़ का सहारा न लेना पड़े।