Sagar - बरसते पानी के बीच बेबस नदी के तट पर पांच घंटे गुंजायमान रहे वेदमंत्र
सागर में शुक्रवार को सुबह से ही बारिश जारी थी लोग घर से बाहर निकलने से बच रहे थे पर बेबस नदी के चितौरा घाट पर पांच घंटे वेदमन्त्र गूंजते रहे अवसर था ब्राह्मणों के श्रावणी उपाकर्म का जिसमें क्षेत्र के प्रतिष्ठित बड़े बड़े विद्वान एकत्रित हुए सनातन वैदिक और ऋषि परंपरा में चार प्रमुख त्योहार चार वर्णों में विभक्त किए गए है जिनमें श्रावणी ब्राह्मण,दशहरा क्षत्रिय,दीपावली वैश्य और होली शूद्र वर्ण का त्योहार माना जाता है।श्रावण पूर्णिमा पर श्रावणी का पर्व मनाया जाता है इसमें ब्राह्मण अपने तेज तप को जाग्रत करते हैं।
सागर में बेबस नदी के तट चितौरा घाट पर वयोवृद्ध पुरोहित पुजारी विद्वत संघ के संभागीय अध्यक्ष राजेंद्रप्रसाद पाण्डेय सानौधा के निर्देशन औररामेश्वरप्रसाद तिवारी बंडा के आचार्यत्व में पुजारी पुरोहित विद्वतजन और ब्राह्मण समाज के लोग प्रातःकाल से जुटे, भीगते हुए लगभग पांच घंटे श्रावणी उपाकर्म कार्यक्रम चला। युवा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष भरत तिवारी ने बताया कि पिछले कई वर्षो से हम लोग श्रावणी उपाकर्म सामूहिक रूप से ही करते आ रहे हैं ये हमारी ऋषि परंपरा का अंग माना जाता है। सबसे पहले प्रायश्चित संकल्प किया गया, इस संकल्प में वर्ष भर के ज्ञात अज्ञात सकल दोषों का शमन किया प्रायश्चित हेमाद्रि संकल्प लगभग एक घंटे तक चला।
पुरोहित पुजारी विद्वत संघ के अध्यक्ष शिवप्रसाद तिवारी ने बताया संकल्प पश्चात बाहशुद्धि के लिए दशविध स्नान और आंतरिक शुद्धि के लिए पंचगव्य का पान सभी को कराया गया,स्नान में गाय का दूध,दही, घी,भस्म, गोबर, मृतिका, दूर्वोदक, कुशोदक,स्वर्णोदक, गोमूत्र एवम तीर्थजल प्रमुख रहते हैं पंचगव्य में गाय का दूध,दही,घी,गोबर, और गोमूत्र का पान किया जाता है। गौ पीठाधीश्वर विपिनबिहारी दास महाराज ने बताया श्रावणी उपाकर्म हम कथा वक्ताओं के लिए भी अति आवश्यक है हमारी बाणी से जाने अनजाने कोई दोष हो जाए तो आज इस कर्म से उसका शमन हो जाता है