Sagar - छह साल की उम्र में गोल्ड मेडल जीतकर अमोघ ने रचा इतिहास, अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाएगा दम
जिस उम्र में बच्चे ठीक से स्कूल जाना और अपनी दिनचर्या संभालना सीख रहे होते हैं, उस उम्र में सागर के नन्हे अमोघ नेमा ने खेल की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूकेजी में पढ़ने वाले अमोघ ने इंदौर में आयोजित 11वीं राज्य स्तरीय कूडो चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
सनराइज मेगा सिटी निवासी डॉ. अंशुल नेमा और ऋचा नेमा के बेटे अमोघ ने पहले जिला स्तरीय प्रतियोगिता में 5 साल 8 महीने की उम्र में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद उसने अंडर-7 कैटेगरी में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया। इंदौर में 21 से 24 अगस्त तक आयोजित चैंपियनशिप में उसने एक बार फिर अपनी प्रतिभा साबित कर गोल्ड मेडल जीता और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए जगह बनाई।
अब अमोघ अहमदाबाद में नवंबर में होने वाली 18वीं अक्षय कुमार कूडो इंटरनेशनल चैंपियनशिप, 7वीं फेडरेशन कप और 17वीं राष्ट्रीय कूडो प्रतियोगिता में हिस्सा लेगा। इतनी छोटी उम्र में लगातार सफलता हासिल करना उसके परिवार के साथ-साथ पूरे सागर के लिए गर्व की बात है।
अमोघ की मां ऋचा नेमा बताती हैं कि आज के समय को देखते हुए वे बेटे को सेल्फ डिफेंस सिखाना चाहते थे। इसी उद्देश्य से उन्होंने उसे कूडो के समर कैंप में भेजा। शुरुआत में यह सिर्फ आत्मरक्षा सीखने की कोशिश थी, लेकिन अमोघ की मेहनत और लगन ने इसे उपलब्धि में बदल दिया।
अमोघ रोजाना करीब डेढ़ घंटे कूडो की प्रैक्टिस करता है और घर पर भी अभ्यास जारी रखता है। इसके अलावा उसे पियानो, स्वीमिंग, स्केटिंग और साइकिलिंग का भी शौक है। पिता डॉ. अंशुल नेमा बताते हैं कि उन्हें खुद भी कराटे का शौक था, लेकिन वे इसे आगे नहीं बढ़ा सके। आज बेटे को खेल में आगे बढ़ते देखकर उन्हें बेहद खुशी है।
अमोघ की कहानी बताती है कि उम्र कभी सपनों की सीमा नहीं होती। सही मार्गदर्शन, लगातार अभ्यास और हौसले के साथ छोटी-सी शुरुआत भी बड़ी सफलता की नींव बन सकती है।