Sagar- ईद के जुलूस में पेपर शॉट मशीन से उड़ाए ऐसे चित्र पुलिस को करना पड़ा मामला दर्ज, जाने क्यों
सागर जिले के बण्डा में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान कथित आपत्तिजनक चित्रों को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि जुलूस के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों को पेपर शॉट मशीन में डालकर उड़ाया गया है. बजरंग दल की शिकायत पर बण्डा थाना पुलिस ने BNS की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं मुस्लिम समाज और आयोजन समिति ने भी प्रशासन को ज्ञापन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दरअसल हम आपको बता दे कि 26 अगस्त को बण्डा नगर में ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर जुलूस निकाला गया था। जुलूस संजय कॉलोनी स्थित मस्जिद से शुरू होकर नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरा। इसी दौरान हिंदू देवी-देवताओं के कथित विरूपित चित्र इलेक्ट्रॉनिक पेपर के माध्यम से प्रदर्शित किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कथित प्रदर्शन से हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज और आयोजन समिति ने मामले को लेकर एसडीओपी प्रदीप बाल्मीकि को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में सोशल मीडिया पर सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। समाज ने जुलूस में इस्तेमाल सामग्री की खरीद, उसके स्रोत, भुगतान और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कराने का अनुरोध किया है।
वही ज्ञापन के माध्यम से मुस्लिम समाज के लोगों ने दावा किया कि जुलूस में फायर गन से कागज के टुकड़े उड़ाए गए थे। इस्तेमाल की गई सामग्री चैतन्य हॉस्पिटल के पीछे स्थित एक नेमा शॉप से खरीदे जाने की जानकारी का भी उल्लेख किया गया है। सामग्री के लिए करीब 2 हजार 550 रुपये के भुगतान और संबंधित लोगों के बण्डा पहुंचने के साधन की भी जांच की मांग की गई है। मुस्लिम समाज ने कहा है कि यदि जांच में किसी व्यक्ति, आयोजन समिति या समाज की ओर से जानबूझकर कानून का उल्लंघन सामने आता है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि किसी अन्य व्यक्ति या दुकानदार की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई हो।
समाज के लोगों ने यह भी कहा कि किसी भी धर्म या धार्मिक आस्था का अपमान करना उनका उद्देश्य नहीं है। यदि अनजाने में हुई किसी गलती से हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्होंने इसके लिए क्षमा मांगी है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जुलूस में वास्तव में किस तरह की सामग्री का इस्तेमाल हुआ और कथित आपत्तिजनक चित्रों के मामले में जिम्मेदारी किसकी थी। प्रशासन से दोनों पक्षों ने निष्पक्ष जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई की मांग की है।