रक्षाबंधन से पहले पुलिस ने ऑपरेशन रिंगटोन 2.0 में 113 मोबाइल बरामद, 21 लाख के फोन मालिकों को लौटाए
मोबाइल गुम हो जाए या चोरी हो जाए तो उसे दोबारा पाना अक्सर मुश्किल माना जाता है, लेकिन एमपी के आगर-मालवा पुलिस ने अपनी तकनीकी ताकत के दम पर ऐसे 113 लोगों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी। ऑपरेशन रिंगटोन 2.0 के तहत पुलिस ने अलग-अलग जिलों और राज्यों से चोरी और गुम हुए 113 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइलों की कुल कीमत करीब 21 लाख रुपए बताई गई है। मोबाइल फोन वापस मिलने की उम्मीद छोड़ चुके लोगों के लिए रक्षाबंधन से पहले पुलिस की यह कार्रवाई किसी तोहफे से कम नहीं रही। मंगलवार को सत्यापन और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने बरामद मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए।
पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी के निर्देशन में साइबर टीम ने गुम और चोरी हुए मोबाइलों की तकनीकी जानकारी जुटाई। इसके बाद मोबाइल के IMEI नंबर और तकनीकी लोकेशन के आधार पर उनकी तलाश शुरू की गई। मोबाइल अलग-अलग जिलों और राज्यों में सक्रिय पाए गए। इसके बाद संबंधित स्थानों की पुलिस से समन्वय स्थापित कर एक-एक कर मोबाइल बरामद किए गए। साइबर तकनीक और पुलिस के आपसी तालमेल से यह कार्रवाई संभव हो सकी।
बरामदगी के बाद जब पुलिस ने मोबाइल मालिकों का सत्यापन किया और उन्हें उनका फोन वापस सौंपा तो लोगों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। लंबे समय से गुम मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने पुलिस और साइबर सेल की टीम का आभार जताया। खासकर रक्षाबंधन से ठीक पहले मोबाइल वापस मिलने से लोगों की खुशी और बढ़ गई। पुलिस की इस कार्रवाई की लोगों ने जमकर सराहना की।
इस पूरे अभियान में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रविन्द्र बोयट के मार्गदर्शन में साइबर सेल की टीम की अहम भूमिका रही। टीम ने तकनीकी जानकारी जुटाने से लेकर IMEI ट्रैकिंग, लोकेशन तलाशने और दूसरे जिलों की पुलिस से समन्वय तक लगातार काम किया। ऑपरेशन रिंगटोन 2.0 ने साबित कर दिया कि मोबाइल गुम होने के बाद उम्मीद खत्म नहीं होती—सही शिकायत और तकनीकी जांच के जरिए उसे दोबारा हासिल किया जा सकता है।