मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की रणनीति अब सिर्फ एमओयू और निवेश प्रस्तावों तक सीमित नहीं है। सरकार का फोकस अब इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारकर फैक्ट्री, उत्पादन और रोजगार में बदलने पर है। इसकी ताजा तस्वीर भिंड के मालनपुर में देखने को मिली, जहां गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की नई एकीकृत विनिर्माण इकाई का शुभारंभ हुआ।
करीब 450 करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश से तैयार इस नई यूनिट से 600 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि मालनपुर की यह सुविधा अब एशिया की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड सोप मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बन गई है। यहां हर मिनट करीब 4 हजार साबुन तैयार किए जा सकेंगे।
गोदरेज का मध्यप्रदेश से रिश्ता भी करीब 35 साल पुराना है। वर्ष 1991 में मालनपुर में पहली यूनिट से शुरू हुआ सफर अब एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब में बदल चुका है। कंपनी के मुताबिक मालनपुर में अब तक करीब 850 करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है। नई यूनिट शुरू होने के बाद यहां कर्मचारियों की संख्या करीब 2200 से बढ़कर 2800 तक पहुंचने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर चंबल के बदलते स्वरूप को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस चंबल की पहचान कभी बीहड़ों और दस्यु समस्या से होती थी, वही चंबल अब उद्योग, निवेश और रोजगार की नई पहचान बना रहा है।
सरकार के मुताबिक, जीआईएस-2025 में मिले करीब 30 लाख 77 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों में से 30 प्रतिशत से ज्यादा जमीन पर उतर चुके हैं, जबकि करीब 10 लाख करोड़ रुपए की औद्योगिक इकाइयां मूर्त रूप ले रही हैं। मध्यप्रदेश से करीब 76 हजार करोड़ रुपए के उत्पादों का निर्यात भी विदेशों तक हो रहा है।
यानी तस्वीर साफ है—निवेश बुलाने के बाद अब उसे धरातल पर उतारने की रफ्तार बढ़ रही है। ग्वालियर-चंबल अंचल में करीब दो महीने के भीतर तीसरी बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का शुभारंभ इसी बदलते औद्योगिक मध्यप्रदेश की कहानी बयां कर रहा है।