रेलवे की तीसरी-चौथी लाइन से किसानों की जमीन और मजदूरों की रोजी पर संकट! SDM कार्यालय पहुंचा विरोध
एमपी के उज्जैन के नागदा-खाचरौद विधानसभा क्षेत्र में रेलवे की प्रस्तावित तीसरी और चौथी रेल लाइन को लेकर किसानों और मजदूरों की चिंता सामने आने लगी है। रेलवे द्वारा लाइन विस्तार के लिए किए जा रहे सर्वे के विरोध में किसानों और मजदूरों से जुड़े लोगों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और प्रभावित परिवारों के हितों की सुरक्षा की मांग की।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में रेलवे की तीसरी और चौथी लाइन के लिए सर्वे का काम चल रहा है। क्षेत्र में पहले भी दो बार सर्वे किया जा चुका है और अब तीसरी बार सर्वे किए जाने की बात सामने आई है। प्रस्तावित रेल लाइन की जद में कई छोटे और गरीब किसानों की जमीन आने की आशंका है। ऐसे में किसान अपनी जमीन और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
किसानों का कहना है कि वे विकास या रेलवे के विस्तार के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत किसानों और मजदूरों को अपनी जमीन और रोजगार गंवाकर नहीं चुकानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहित की जाती है तो प्रभावित किसानों को उनकी जमीन का उचित और सम्मानजनक मुआवजा मिलना चाहिए।
इस परियोजना से क्षेत्र के कई ईंट भट्ठों के प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। इन भट्ठों में बड़ी संख्या में मजदूर काम करते हैं और उन्हीं की आमदनी से उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। यदि रेलवे लाइन की वजह से ईंट भट्ठे बंद होते हैं तो मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि जिन किसानों की जमीन रेलवे परियोजना में जाती है, उन्हें वर्तमान बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए कम से कम चार गुना मुआवजा दिया जाए। साथ ही प्रभावित ईंट भट्ठा संचालकों और मजदूरों के हितों की भी उचित व्यवस्था की जाए। ज्ञापन देने पहुंचे लोगों ने साफ कहा कि रेलवे विस्तार जरूरी है, लेकिन इसके साथ किसानों के अधिकार और मजदूरों की रोजी-रोटी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। दिलीप सिंह शेखावत ने कहा कि प्रभावित किसानों और मजदूरों के हक की लड़ाई मजबूती से जारी रहेगी। अब देखना होगा कि रेलवे परियोजना के अगले चरण में प्रशासन और रेलवे प्रभावित लोगों की चिंताओं का किस तरह समाधान करता है।