11वी सदी का प्राचीन ऐतिहासिक शिवलिंग,भोजेश्वर महादेव का महाकाल श्रृंगार, आज भी अधूरा है मंदिर का निर्माण
एक ऐसा शिवलिंग जो ऐतिहासिक भी है और काफी अनूठा भी, ये दुनिया का प्राचीन शिवलिंग 11वी सदी का माना जाता है। आपको नज़र आने वाली ये तस्वीरें रायसेन जिले के भोजपुर की हैं। जहां सावन के आख़िरी सोमवार पर विश्व के विशाल शिवलिंग भोजेश्वर महादेव का महाकाल श्रृंगार हुआ। जहां बड़ी संख्या में पहुंचे वहीं इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। दिलचस्प बात ये है की भोजेश्वर महादेव के भक्तो ने हर सोमवार को अलग-अलग श्रृंगार में दर्शन किये। पहले सोमबार ॐ कार स्वरूप में, दूसरे सोमवार को त्रिलोक स्वामी स्वरूप में, तीसरे सोमवार नागेश्वर स्वरूप में और आख़िरी सोमवार को महाकाल स्वरूप में श्रृंगार किया गया।
रायसेन जिले के भोजपुर में स्थित भोजेश्वर महादेव के भक्त आख़िरी सावन सोमवार पर महाकाल स्वरूप में दर्शन कर रहे है। भोजपुर गांव राजधानी भोपाल से करीब 30 किलोमीटर दूर है। जो अब ASI के आधीन हैं। यह मंदिर वास्तुकला की भव्यता और इसका ऐतिहासिक महत्व आज भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भोजपाल (भोपाल) के राजा भोज के संरक्षण में 11वीं शताब्दी के दौरान निर्मित यह मंदिर भारत में परमार काल के दौरान मंदिर वास्तुकला के शिखर का प्रतिनिधित्व करता है।
यह एक जीवंत मंदिर है जहाँ भक्त साल भर कई मौकों पर अपनी प्रार्थनाएँ करने इकट्ठा होते हैं। यह मंदिर अपनी प्राचीनता और विशालता के लिए प्रसिद्ध है। इस भोजेश्वर महादेव मंदिर को सोमनाथ ऑफ द ईस्ट भी कहा जाता है यानि पूर्व के सोमनाथ मंदिर के नाम से मशहूर है। इसका विशाल आकार, विशाल लिंगम और जटिल नक्काशीदार तत्व परमार वंश की कलात्मक और इंजीनियरिंग कौशल को प्रदर्शित करते हैं। महाशिवरात्रि पर हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं। मंदिर में शिवलिंग का अभिषेक अलग तरह से होता है। जिलहरी से शिवलिंग साढ़े 7 फिट ऊपर है। पुजारी को खुद सीढ़ी लगाकर ऊपर जाकर अभिषेक करना पड़ता है। यह मंदिर चार बड़े स्तंभों पर टिका हुआ है।
कहा जाता है की मंदिर को एक ही रात में बनाना था। लेकिन सूर्योदय तक निर्माण पूरा नहीं हो पाया था। जिससे इसका निर्माण आज भी अधूरा माना जाता है। ऐसी किवदंती है की राजा भोज ने एक गंभीर बीमारी से ठीक होने के बाद दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना के उद्देश्य से एक मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की थी।