Sagar- देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, भाईयों ने बहन को नहीं दी अंतिम विदाई, लोगों ने निभाई इंसानियत
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इंसान, आख़िरी समय में जहां अपनों ने साथ नहीं निभाया वहां गैरों ने साथ दिया। इंसानियत को शर्मसार और रिश्तों को झखझोर देने वाली खबर सागर जिले के बीना से सामने आई है। जहां एक बहन की जान जाने के बाद उसके भाइयों ने ही अंतिम संस्कार से साफ़ इंकार कर दिया। तब सामाजिक लोग आगे आये और महिला को अंतिम विदाई दी गई।
मतलब जिस बहन ने रक्षाबंधन पर भाइयों को रक्षा का सूत्र बांधा, हमेशा रक्षा का संकल्प लिया गया होगा। उन्ही भाइयों ने आख़िरी समय में साथ नहीं निभाया। मामला तब सामने आया जब भाई बहन का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार नजदीक है। इस बात ने सोचने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल परिवार ने उससे नाता तब तोड़ दिया था जब महिला अपने पति से अलग होकर मायके रहने आई थी।
बताया जा रहा है की 50 साल की ममता चार महीने से अस्पताल परिसर में रह रही थी। जब जिंदगी का सफर थमा तो उसके भाइयों ने अंतिम जिम्मेदारी लेने से भी इनकार कर दिया। जानकारी के मुताबिक पति से तलाक के बाद ममता मायके लौटी थी। लेकिन परिवार का साथ नहीं मिला। भटकते हुए वह अस्पताल पहुंची और चार महीने तक वहीं रही। अस्पताल कर्मचारी और सामाजिक लोग उसे भोजन उपलब्ध कराते रहे। तबीयत बिगड़ने के बाद ममता नहीं बच सकी। भाइयों को सूचना दी गई। लेकिन उन्होंने उसे साथ ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद सामाजिक लोगों ने आगे आकर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई।
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट रिश्ते का त्योहार है। लेकिन त्योहार से पहले ममता की कहानी एक सवाल छोड़ गई। क्या राखी का रिश्ता सिर्फ कलाई तक सीमित है। या मुश्किल वक्त में बहन का साथ निभाना भी भाई का फर्ज है। ममता की कहानी जितनी भावुक है उतनी ही संवेदनाओं से भरी है। क्या राखी और रिश्तों की डोर इतनी कमजोर हो चुकी है।------