पुलिया नहीं, मजबूरी में नदी पार! मासूमों की जा न जोखिम में, विकास के दावों की खुली पोल
एमपी के सागर संभाग के छतरपुर जिले के महाराजपुर नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 15, हरपई में विकास के दावों की तस्वीर परेशान करने वाली है। यहां कुम्हेड़ नदी पर पुलिया नहीं होने के कारण 50 से ज्यादा परिवारों की जिंदगी बारिश में मुसीबत बन जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जिन्हें तेज बहाव के बीच नदी पार कर घर लौटना पड़ता है।
हरपई में कुशवाहा और पटेल समाज के 50 से अधिक परिवार रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए कुम्हेड़ नदी पर पुलिया बेहद जरूरी है। ग्रामीण कई वर्षों से पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार समस्या बताई गई, लेकिन उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।
बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही हालात और खतरनाक हो जाते हैं। सामने आई तस्वीरें सिस्टम की अनदेखी की कहानी बयां कर रही हैं। लीड इंडिया स्कूल महाराजपुर की ड्रेस पहने एक मासूम छात्र नदी किनारे पानी कम होने का इंतजार करता नजर आया। आगे पानी का बहाव इतना तेज था कि उसके लिए अकेले नदी पार करना संभव नहीं था।
इसके बाद दो युवक अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में उतरे और बच्चों को कंधे पर बैठाकर तेज बहाव पार कराया। जिस उम्र में बच्चों के हाथ में किताब और स्कूल बैग होना चाहिए, उस उम्र में उन्हें जान बचाने के लिए नदी के बहाव से जूझना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह परेशानी सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है। बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों के लिए भी नदी पार करना मुश्किल हो जाता है। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना तक चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जा रहा है?
अगर नदी का बहाव अचानक बढ़ जाए और कोई बच्चा उसकी चपेट में आ जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? ग्रामीण देशराज साहू और राजू सहित अन्य लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कुम्हेड़ नदी पर जल्द पुलिया निर्माण की मांग की है। अब सवाल सीधा है—क्या बच्चों की जिंदगी दांव पर लगाकर विकास के दावों को सच माना जाएगा, या प्रशासन किसी हादसे से पहले इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा?