नाले की जमीन के कारण 36 घंटे से पानी में फं से विधायक, भवन अनुमति पर भी सवाल
एमपी के रीवा में हुई मूसलाधार बारिश ने आम लोगों के साथ-साथ सत्ता के गलियारों तक पानी पहुंचा दिया है। भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह का आवास भीषण जलभराव की चपेट में है। बताया जा रहा है कि विधायक अपने परिवार के साथ करीब 36 घंटे से पानी के बीच फंसे हुए हैं। वहीं, आवास से पानी निकालने के लिए नगर निगम की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
लेकिन यह मामला सिर्फ एक वीआईपी आवास में पानी भरने तक सीमित नहीं है। जलभराव के साथ करीब तीन दशक पुराने निर्माण, कथित नाले की जमीन, अतिक्रमण और नगर निगम की भवन अनुमति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, जिस जगह पर वर्तमान में आवास और फार्महाउस बना है, वहां करीब 36 साल पहले निर्माण शुरू हुआ था। आरोप है कि यह जमीन कभी नाले या प्राकृतिक जल निकासी क्षेत्र का हिस्सा थी। अगर ऐसा है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि यहां निर्माण की अनुमति कैसे मिली?
विधायक की ओर से कहा गया है कि मकान निर्माण के समय नगर निगम से भवन निर्माण की अनुमति ली गई थी। ऐसे में अब सवाल नगर निगम की अनुमति प्रक्रिया पर भी है। क्या भवन अनुमति देने से पहले जमीन का राजस्व रिकॉर्ड जांचा गया था? क्या मौके का निरीक्षण हुआ था? क्या प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते को ध्यान में रखा गया था?
क्योंकि अगर जल निकासी का प्राकृतिक रास्ता बाधित होता है, तो उसका असर सिर्फ एक परिसर पर नहीं पड़ता। बारिश का पानी दूसरे इलाकों में जमा होकर बड़े जलभराव का कारण बन सकता है। वहीं करीब 36 घंटे तक विधायक का आवास पानी में घिरे रहने से नगर निगम और जिला प्रशासन की जल निकासी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर इतने लंबे समय तक पानी क्यों जमा रहा? क्या पंपिंग की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी या प्रशासन ने मामले को प्राथमिकता से नहीं लिया?
अब इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की जरूरत है। जमीन का मूल रिकॉर्ड क्या था, नाला कहां था, निर्माण कब शुरू हुआ, अनुमति किस अधिकारी ने दी और मौके पर क्या निरीक्षण किया गया—इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए। क्योंकि असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि विधायक का घर पानी में क्यों डूबा? सवाल यह भी है कि जिस जगह पानी का रास्ता होना चाहिए था, वहां आखिर निर्माण कैसे खड़ा हो गया?