कुदरत का कहर, बाढ़ में फंसा एक व्यक्ति मदद के इंतजार में बह गया,छत पर फंसे रहे तीन मजदूर
फिर एक बार कुदरत का कहर देखने को मिला है जहां एक व्यक्ति बाढ़ में फंसकर दो घंटे तक पत्थर पकड़कर चेकेहता चिल्लाता और गुहार लगाता रहा, ज़िंदगी से जूझता रहा लेकिन उस तक मदद नहीं पहुंची और वह तेज धार में बह गया।
जिससे अब प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। तस्वीरें एमपी के मऊगंज जिलेके नईगढ़ी की हैं। जहां बाढ़ ने जमकर कहर बरपाया। एक तरफ मजदूर पानी में बह गया वहीं निर्माणाधीन भवन की छत पर तीन मजदूर करीब सात घंटे तक फंसे रहे।
रीवा संभाग के मऊगंज जिले के नईगढ़ी में कुदरत की मार देखने मिली। वहीं प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल भारी बारिश के बाद पूरा नईगढ़ी नगर जलमग्न है। घरों में पानी घुस चुका है। दीवारें गिर रही हैं कई परिवार सुरक्षित स्थानों तरफ जाने को मजबूर हैं। बाढ़ के बीच अष्टभुजा नदी के पास सामने आया एक वीडियो सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है। जहां एक मजदूर तेज बहाव में बह गया वह नदी के बीच पत्थर को पकड़कर संघर्ष का रहा था। मदद के लिए गुहार लगाता रहा। लेकिन रेस्क्यू टीम नहीं पहुंची। बहाव में भी शख्स का कहीं कुछ पता नहीं चला।
इसके अलावा निर्माणाधीन भवन की छत पर तीन मजदूर घंटों तक फंसे रहे। जिससे आपदा के दौरान प्रशासनिक तैयारी और रेस्क्यू व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया गया की मऊगंज का नईगढ़ी कस्बा भारी बारिश की चपेट में है। कई इलाकों में पानी भर चुका है। तहसील कार्यालय और छात्रावास तक जलमग्न हैं। सड़कों पर नदी जैसा बहाव नजर आ रहा है।
जानकारी के मुताबिक अष्टभुजा नदी के पास एक निर्माणाधीन भवन में काम करने वाले मजदूरों के सामने जान बचाने का संकट खड़ा हो गया। गोरखपुर निवासी एक मजदूर बह रही निर्माण सामग्री को बचाने की कोशिश में तेज बहाव की चपेट में आ गया। पत्थर के पास पहुंचकर जान बचाने की कोशिश करता रहा। आसपास कई लोग मौजूद थे लेकिन तेज बहाव के चलते कोई उसके पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। हाथ छूटते ही वह बह गया। जबकि इसी दौरान निर्माणाधीन भवन की छत पर तीन मजदूर भी घंटों तक फंसे रहे। सुबह करीब 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक वे मदद की आस में छत पर बैठे रहे। भूख-प्यास और चारों तरफ बढ़ते पानी के बीच उनकी जिंदगी भी खतरे में बनी रही।
सबसे बड़ा सवाल ये है की मजदूर को बचाने में देर क्यों की गयी। क्या आपदा प्रबंधन की तैयारियां पूरी नहीं है। ढील क्यों बरती गयी। आखिर इस मौत का जिम्मेदार कौन है। प्रशासन पर भी गंभीर सवाल है। क्या इस हादसे के लिए किसी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।