बारिश ने मचाई तबाही, नदियों का रौद्र रूप और संकट की आहट, सभी नदी-नाले उफान पर होने से बिगड़े हालात
लगातार जारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। एक तरफ जहां नदी-नाले अपने शबाव पर चल रहे हैं तो वहीं कई ऐसे इलाके हैं जहां पानी भरा हुआ है तो करीब तीन दर्जन गांवों का शहर से संपर्क टूट गया है। नदियां अपने रौद्र रूप में नज़र आ रही हैं। हैरान करने वाला ये नज़ारा एमपी के रीवा जिले का है। जहां तराई अंचल त्यौंथर और जवा क्षेत्र में लगातार चौथे दिन भी बाढ़ के हालात बने हुए हैं। बैराज और बांधों के गेट खोले जाने के बाद टमस, बेलन, नैना समेत क्षेत्र की कई नदियां और नदी-नाले उफान पर हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीण इलाकों में संकट बढ़ा दिया है। करीब 30 से ज्यादा गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। खुद मंत्री राजेंद्र शुक्ला भी हालातों पर नज़र बनाये हुए हैं।
बताया गया की रीवा के बाकिया बैराज के 12 गेट और बीहर बैराज के 18 गेट खोले गए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर क्षेत्र में स्थित मेजा बांध के 5 गेट और अदवा बांध के 3 गेट खोले जाने के बाद नदियों में पानी का प्रवाह तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा असर त्यौंथर तहसील के तराई क्षेत्र में दिखाई दे रहा है।
पिछले चार दिनों से लगातार बढ़ रहे जलस्तर से टमस, बेलन और नैना नदियों के आसपास बसे गांवों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। कई स्थानों पर सड़कें और पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने से आवागमन बाधित हो गया है। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी सामान की व्यवस्था को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। बाढ़ को देखते हुए स्कूलों की छुट्टी कर दी गयी है। पूरा प्रशासनिक अमला डटा हुआ है। लगातार प्रभावित क्षेत्रों की मॉनिटरिंग कर रहा है। विधायक और कलेक्टर खुद गांव-गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों के संबंध में ज़रूरी निर्देश दिए जा रहे हैं।
प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला भी रीवा जिले की बाढ़ प्रभावित स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर ने त्यौंथर और जवा के तराई क्षेत्र में संकट खड़ा कर दिया है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण चिंतित हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने साथ ही अनावश्यक रूप से पानी के तेज बहाव को पार न करने की अपील की है।