चौराहे पर ग्रामीणों का चक्काजाम, शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त होने से भड़का आक्रोश
नेशनल हाईवे-45 पर शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद एमपी के जबलपुर से भोपाल के बीच यातायात का रूट डायवर्ट किए जाने का असर अब स्थानीय लोगों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। डायवर्ट रूट पर बढ़ी भारी वाहनों की आवाजाही और लगातार हो रहे सड़क हादसों से नाराज बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पाटन चौराहे पर चक्काजाम कर धरना दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद वाहनों को शहपुरा-पाटन मार्ग से निकाला जा रहा है। इससे इस सड़क पर अचानक भारी वाहनों का दबाव बढ़ गया है। करीब 10 किलोमीटर की दूरी कम समय में तय करने की कोशिश में कई वाहन तेज रफ्तार से दौड़ते हैं, जिसके चलते सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक डायवर्ट रूट पर लगातार हादसे हो रहे हैं और अब तक करीब 45 लोगों की जान जा चुकी है। हादसों से नाराज ग्रामीणों ने करीब 10 दिन पहले ही उग्र आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर ग्रामीण सड़क पर उतर आए। धरने में स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने शहपुरा-पाटन मार्ग के पुनर्निर्माण और क्षतिग्रस्त रेलवे ओवरब्रिज को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सुरक्षित और बेहतर सड़क व्यवस्था नहीं होगी, तब तक हादसों का सिलसिला थमना मुश्किल है।
शहपुरा-पाटन सड़क का मुद्दा भाजपा विधायक अजय बिश्नोई भी पहले उठा चुके हैं। अब ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें दोहराते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि पाटन-जबलपुर मार्ग पर शहपुरा की ओर डायवर्ट किए गए भारी वाहनों की आवाजाही बंद की जाए। इसके साथ ही पाटन-जबलपुर फोरलेन और मनकेड़ी सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाए। किसानों से जुड़ी मांगों को भी आंदोलन में प्रमुखता से उठाया गया।
प्रदर्शनकारियों ने किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने, फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित करने और किसानों को निर्बाध एवं पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन केवल सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और शहपुरा-पाटन मार्ग पर बढ़ते हादसों को रोकने के लिए कब तक ठोस व्यवस्था की जाती है।