डेयरी कारखानों पर छापे, संदिग्ध मावा जब्त, त्योहारों से पहले मिलावटखोरों पर बड़ा शिकंजा!
त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले एमपी के रीवा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर के निर्देश पर चलाए जा रहे मिलावट से मुक्ति अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शहर और आसपास के इलाकों में कई डेयरी प्रतिष्ठानों और कारखानों पर अचानक दबिश दी।
कार्रवाई के दौरान संदिग्ध मावा मिलने से हड़कंप मच गया, जबकि मावा, दही और पनीर के नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। सबसे पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने रोसर स्थित रम्पत डेयरी के कारखाने में औचक निरीक्षण किया। टीम के पहुंचने पर संचालक रामपति यादव ने कथित तौर पर अधिकारियों को बाहर रोकने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद संदिग्ध मावे को कारखाने के पीछे खेत में कंटीली झाड़ियों के बीच छिपा दिया गया।
टीम को जब इस गतिविधि पर संदेह हुआ तो परिसर और आसपास के इलाके की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान झाड़ियों में छिपाकर रखा गया मावा बरामद हो गया। प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए जाने पर मावे को जब्त कर लिया गया। इसके साथ ही कारखाने में तैयार किए जा रहे मावा और दही के नमूने भी लिए गए हैं। इसके बाद टीम कुठुलिया मोड़ स्थित शगुन डेयरी पहुंची। यहां निरीक्षण के दौरान पनीर और मावा के सैंपल लिए गए, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
वहीं नेहरू नगर की बालकृष्ण डेयरी में भी मावे का स्टॉक मिला। संचालक सच्चिदानंद पांडे ने अधिकारियों को बताया कि यह मावा उनके कारखाने में तैयार नहीं हुआ, बल्कि मानिकपुरा के व्यापारी मातादीन से खरीदकर त्योहारों के लिए स्टॉक किया गया था। विभाग ने यहां से भी मावे का नमूना जांच के लिए लिया है। अब सभी नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार है।
रिपोर्ट में मिलावट या गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी सामने आने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा विभाग ने साफ किया है कि त्योहारों के दौरान लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जिलेभर में डेयरी, मिठाई और खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच का अभियान आगे भी जारी रहेगा।