दतिया में बाजार बंद नहीं खुली दुकानें, नरोत्तम मिश्रा के समर्थक नाराज़, टिकिट बदलने की पुरजोर मांग
कभी सरकार में नंबर दो कहलाने वाले पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा जिन्होंने करीब तीन महीने पहले ही चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन उन्हें झटका तब लगा जब भाजपा ने दतिया उपचुनाव में उनका टिकिट काटते हुए आशुतोष तिवारी को मैदान में उतार दिया। जिसके बाद से जारी बवाल अभी भी नहीं थमा है। कई घंटों प्रदर्शन के बाद दतिया में बाज़ार नहीं खुला है दुकानों की शटरें बंद हैं। जो कुछ दुकानें खुली हुई हैं उनमें भी आधे शटर लटके हुए हैं। पुलिस हर स्थिति पर नज़र बनाये हुए हैं। जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया है। लोगों में आक्रोश है इस्तीफों का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री के खिलाफ तक नारेबाजी की गयी। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का कहना है की वह आहत हैं पार्टी को विचार करना चाहिए। टिकिट बदला जाना चाहिए। इससे पहले अलसुबह पुलिस पर आरोप है की उन्होंने आंसू गैस के गोले दागते हुए भीड़ को तितर बितर किया। लाठी चार्ज भी किया गया जिसमें कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं। तो कुछ पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए हैं। वहीं वाहनों में भी तोड़फोड़ की गयी। जबकि पुलिस वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि पुलिस ने लाठीचार्ज से इंकार किया है। खुद कलेक्टर-एसपी ने मोर्चा संभाला। भाजपा कार्यालय में तकरीबन ढाई सौ कार्यकर्ताओं को नज़रबंद किया गया।
नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में अपने इस्तीफे देने वाले उनके समर्थकों का कहना है की भाजपा ने ऐसे व्यक्ति को टिकिट दे दिया जिसे कोई भी नहीं जानता। कार्यकर्ता तक नहीं जानते। जिसको लेकर शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे। लेकिन पुलिस ने करीब साढ़े चार बजे सुबह लाठीचार्ज कर दिया। कई कार्यकर्ताओं को भाजपा कार्यालय में नज़रबंद भी किया गया। घायल कार्यकर्ता का अस्पताल में इलाज जारी है उसका कहना है की केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व को विचार करना चाहिए। नरोत्तम मिश्रा को ही टिकिट दिया जाना चाहिए।
वहीं तमाम चीजों के बाद नरोत्तम मिश्रा की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आई। जिसमें उन्होंने कहा की टिकट देना या काटना पार्टी का निर्णय है वह इस पर पहले भी अपनी बात रख चुके हैं। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों से भावावेश में कोई भी गलत कदम नहीं उठाने की अपील की।------