यातायात पुलिस के फरमान पर ऑटो चालकों ने खोला मोर्चा, दो शिफ्ट का विरोध, निर्णय बदलने की मांग
यातायात पुलिस के द्वारा एक फरमान जारी किया गया की आधे सवारी ऑटो दिन में चलाये जाएंगे और आधे ऑटो रात के समय, मतलब 5 हजार ऑटो दो शिफ्टों में चलेंगे। आधे ऑटो दिन में दौड़ेंगे और आधे रात में, लेकिन इस निर्णय के खिलाफ ऑटो चालकों ने मोर्चा खोल दिया। साथ ही यातायात पुलिस के इस निर्णय को गलत और अन्यायपूर्ण बताया। हम बात कर रहे हैं उज्जैन जिले की। जहां ऑटो चालकों का आक्रोश देखने को मिला। उन्होंने दो शिफ्टों के रुट फरमान और डायवर्ज़न पर प्रशासन को घेरा। साथ ही प्रशासन को घेरते हुए फैसलों पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
ऑटो चालकों का तर्क है कि ऑटो का परमिट चौबीसों घंटे का होता है ऐसे में पुलिस का यह निर्णय पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है। भारतीय ऑटो संघ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा की पुलिस को अपनी ऊर्जा दो शिफ्ट के नियम लागू करने के बजाय शहर में अनियंत्रित रूप से दौड़ रहे ई-रिक्शा पर लगाम लगाने में लगानी चाहिए। क्योंकि ई-रिक्शा के कारण ही यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
चालकों ने हरि फाटक से बेगम बाग की ओर जाने वाले मार्ग को प्रतिबंधित करने के हालिया फैसले को भी तुगलकी फरमान करार दिया है। संघ का कहना है कि इस रूट को बंद करने से आम जनता, विशेषकर बुजुर्गों और दिव्यांगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य मार्ग बंद होने से यात्रियों को लंबा चक्कर काटना पड़ता है, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय ऑटो संघ ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर इन सभी फैसलों पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है की अगर पुलिस प्रशासन ने अपने इन फैसलों को वापस नहीं लिया, तो ऑटो चालक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अब देखने वाली बात होती है की प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है। नियमों में बदलाव किया जाता है या टकराव की स्थिति और बढ़ेगी।--