सागर-6 साल की प्रकृति ने 95 साल के योग गुरु संग मंच किया साझा, दर्जनों लोगों को कराया योगाभ्यास
कहते हैं की सीखने की कहां कोई उम्र होती है। बस सच्ची निष्ठा और लगन होनी चाहिए तो हर चीज आसान हो जाती है। इसी तरह सागर की एक छह साल की नन्ही योग प्रशिक्षक भी है। जो प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। ये हैं प्रकृति तिवारी, जो अपने पिता महेश तिवारी के नक़्शे कदम पर चल रही हैं। जिन्होंने सागर के 95 साल के योग गुरु विष्णु आर्य के साथ मंच साझा करते हुए दर्जनों लोगों को योगाभ्यास कराया। इनके पिता महेश तिवारी प्रकृति प्रेमी हैं जो लगातार इस तरह की चीजों को बढ़ावा देते आ रहे हैं। साथ ही पर्यावरण का भी संदेश देते हैं।
बता दें की अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में महज 6 साल की प्रकृति तिवारी ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और योग के प्रति समर्पण से सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रकृति ने वरिष्ठ योग गुरु विष्णु आर्य के साथ मंच साझा करते हुए लोगों को योगाभ्यास कराया। साथ ही यह संदेश दिया की योग की शुरुआत किसी भी उम्र में की जा सकती है। दिलचस्प बात ये है की प्रकृति पिछले 285 दिनों से लगातार बिना एक भी दिन का विराम लिए योगाभ्यास कर रही है। वह हर दिन न्यूनतम 12 सेट सूर्य नमस्कार (लगभग 144 आसन) वहीं करीब 10 अन्य महत्वपूर्ण योगासनों का अभ्यास करती है। उसका व्यक्तिगत रिकॉर्ड लगातार 45 सेट सूर्य नमस्कार (लगभग 540 आसन) करने का है। कई मौकों पर उसने 30, 40 और 45 सेट तक सूर्य नमस्कार कर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन का परिचय दिया है।
वैसे तो प्रकृति जब महज चार साल की थी तभी से योगा कर रही है। जिसका अभ्यास कभी कभी होता था लेकिन पिछले 10 महीनों से लगातार योगाभ्यास कर रही है। जिसका नतीजा उसकी पढ़ाई पर भी नज़र आता है। स्कूल में उसकी मौजूदगी 100 प्रतिशत रही है उसे बेस्ट अटेंडेंस का सम्मान भी हासिल हो चुका है। आज के दौर में जब अधिकांश बच्चे मोबाइल, जंक फूड और स्क्रीन की आदतों से प्रभावित हो रहे हैं। वहीं प्रकृति अनुशासित दिनचर्या, नियमित योग और स्वस्थ जीवनशैली का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है। वह जंक फूड, बिस्किट, कुरकुरे, टॉफी, नमकीन समेत ऐसी चीजों से दूर रहती है मोबाइल स्क्रीन का उपयोग भी नहीं करती।
एक तरफ कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उसकी सराहना की तो योग गुरु विष्णु आर्य ने भी आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया।
प्रकृति के पिता महेश तिवारी खुद पर्यावरण प्रेमी हैं। वह लगातार लोगों को जागरूक करते आ रहे हैं। खुद योग प्रशिक्षक भी हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने जिला प्रशासन और कलेक्टर के निर्देशन में कोविड सेंटरों में जाकर मरीजों को योग और प्राणायाम का प्रशिक्षण दिया था। उनकी पत्नी साक्षी तिवारी भी कोविड से गंभीर रूप से प्रभावित हुई थीं। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ी थी। ऐसे कठिन समय में महेश तिवारी ने नियमित प्राणायाम, योगाभ्यास, इलाज और सकारात्मक मनोबल से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया।
प्रकृति का सपना है कि योग के माध्यम से सागर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जाए।------